सुरक्षित नहीं आधे माध्यमिक विद्यालयों के भवन
बिजनौर। जिले के पचास फीसदी माध्यमिक विद्यालयों के भवन सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं हैं। इन विद्यालयों पर नेशनल बिल्डिंग कोड अर्थात एनबीसी का पालन नहीं किया जा रहा है। इसलिए विद्यालयों के भवनों को छात्रों के लिए असुरक्षित माना जा रहा है। वहीं, शिक्षा विभाग ऐसे विद्यालयों का निर्माण एनबीसी लागू होने से पहले होने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहा है।
जिले में यूपी बोर्ड से मान्यता प्राप्त 387 माध्यमिक विद्यालय हैं। इनमें 32 राजकीय, 73 सहायता प्राप्त विद्यालय, 282 वित्तविहीन विद्यालय हैं। शासन ने छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विद्यालयों के भवन निर्माण के लिए गाइड लाइन तय कर रखी हैं। विद्यालयों के भवनों के निर्माण के लिए नेशनल बिल्डिंग कोड अर्थात एनबीसी बना है। एनबीसी में तय मानकों के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग पर है। विद्यालयों की मान्यता के लिए पीडब्ल्यूडी से भवन मानकों का पालन करने और फायर विभाग से विद्यालय में आग से बचाव के लिए जरूरी संसाधन होने का अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना जरूरी है। प्रदेश में एनबीसी वर्ष 2005 में लागू हुआ था। शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार सहायता प्राप्त 73 विद्यालय, 16 राजकीय विद्यालय तथा 60 वित्तविहीन विद्यालयों के भवन वर्ष 2005 से पहले के बने हैं। शासन ने देश प्रदेश के संस्थानों में हुए कई भीषण अग्निकांड के बाद एनबीसी मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसके लिए डीआईओएस दफ्तर तथा फायर विभाग ने अभियान चलाया।
विद्यालयों ने तात्कालिक रूप से कुछ बदलाव भी किए परंतु समय बीतने के साथ मामला ठंडे बस्ते में चला गया। विद्यालय पुराने ढर्रे पर लौट आए। अभिभावकों बलबीर सिंह, राकेश कुमार, नरेंद्र, विमल कुमार, गजेंद्र का आरोप है कि अनेक विद्यालयों के भवन कमजोर हो गए हैं। विद्यालय भवनों की मरम्मत कराने के लिए कहने पर फंड नहीं होने की बात कही जाती है। शहरों के विद्यालय ऐसी जगह हैं कि जहां पहुंचने के रास्ते संकरे हैं। वहां जब जीप या कार के पहुंचने में परेशानी होती है तो कोई हादसा होने पर फायर विभाग की गाड़ी कैसे पहचेगी।
डीआईओएस का कहना है कि मान्यता के लिए विद्यालयों से एनबीसी तथा फायर विभाग का एनओसी लिया जाता है। वर्ष 2005 से पहले एनबीसी लागू नहीं था। शासन के निर्देशों के अनुपालन में सभी विद्यालयों को भूकंपरोधी भवन और आग से बचाव के संसाधन सुनिश्चित करने के निर्देश पहले ही दे दिए गए हैं।
नेशनल बिल्डिंग कोड के ये हैं प्रमुख मानक
1- विद्यालय के खिड़की दरवाजे लकड़ी के नहीं होने चाहिए।
2- विद्यालय की बिल्डिंग के चारों ओर 12 फुट चौड़ा रास्ता होना चाहिए। इससे फायर विभाग की गाड़ी आसानी से जा सके।
3- कमरे में दो दरवाजे तथा रोशनदान होने चाहिए।
4- छात्रों को कक्षाओं में आने जाने के लिए दो जीने होने चाहिए।
5- ग्राउंड फ्लोर के कमरों की ऊंचाई 3.6 मीटर तथा प्रथम मंजिल के कमरे की ऊंचाई 3.3 मीटर होनी चाहिए।
6- जीना 1.6 मीटर से 1.8 मीटर चौड़ा होना चाहिए।
7- जीने की सीढ़ियों की चौड़ाई 23 सेमी तथा ऊंचाई 12 सेमी होनी चाहिए।
8- इलैक्ट्रिक वायरिंग तय मानक के अनुरूप होनी चाहिए।