बिजनौर। जिले में आए दिन एंटीबायोटिक दवा के नमूने जांच में फेल आ रहे हैं। अब जांच में एंटीबायोटिक सैनक्लैव-625 एलबी टैबलेट का नमूना फेल आया है। इस दवा का प्रयोग बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण का इलाज करने के लिए किया जाता है। इस दवा के सेवन से मरीजों को पूरा फायदा नहीं होगा।
औषधि निरीक्षक उमेश भारती ने नजीबाबाद के संसार हॉस्पिटल में संचालित रैयान मेडिकोज से सैनक्लैव-625 एलबी टैबलेट का नमूना लिया था। इस दवा में एमोक्सिसिलिन, पोटेशियम क्लैवुलनेट लेटिक एसिड का मिश्रण था। इस टैबलेट को रूसान लाइफकेयर अबुल फजल एन्क्लेव, नई दिल्ली कंपनी ने बाजार में बेचा गया। जबकि, इस दवा को सिस्टोलिक रेमीडीज प्राइवेट लिमिटेड, सिरमोर कंपनी ने बनाया था। औषधि निरीक्षक ने बताया कि अब मेडिकल संचालक के खिलाफ वाद दायर करने की तैयारी चल रही है। लगातार दवाइयों के नमूने लेकर जांच के भेजे जा रहे हैं। ताकि, मरीजों को सही दवाई उपलब्ध हो।
इस साल 10 से ज्यादा दवाइयों के नमूने आए फेल
औषधि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, जिले में इस साल 10 से ज्यादा दवाइयों के नमूने जांच में फेल आए हैं। इनमें एंटीबायोटिक, दर्द निवारक दवा ज्यादा शामिल हैं। वहीं, वैटनरी दवा भी जांच में फेल पाई गई हैं।
सही साल्ट नहीं होने से मरीज की तबीयत में देरी से होगा सुधार
मेडिकल अस्पताल के चिकित्सक डॉ. तुहिन वशिष्ठ का कहना है कि अगर, दवा में मानक के अनुरूप साल्ट नहीं होगा तो वह पूरे तरीके से काम नहीं करेगी। इससे मरीज की तबीयत में सुधार नहीं होगा। बल्कि स्वास्थ्य बिगड़ेगा। मरीज को 100 एमजी टैबलेट की आवश्यकता है और साल्ट कम है तो मरीज को सही मात्रा में डोज नहीं मिलने से तबीयत में जल्द सुधार नहीं होगा।