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Bijnor News: जंग खा रही विरासत...दो हजार कीमत, 55 हजार किराया

Sun, 28 Sep 2025 11:54 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
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स्योहारा। वारिसों के नाम शस्त्र लाइसेंस नहीं बनने से बड़ी संख्या में हथियार शस्त्र की दुकानों में सेफ कस्टडी में जंग खा रहे हैं। यह प्रक्रिया वर्षों से लंबित है। स्थिति यह है कि नगर की दो दुकानों पर ही हजारों हथियार जमा हैं। जिन बंदूकों की मौजूदा कीमत दो हजार रुपये भी नहीं रही, उनका किराया 55 हजार तक हो चुका है।
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देवरा गन हाउस के मालिक डॉ. विनीत देवरा और चौधरी गन हाउस के मालिक चौधरी जिया-उर-रहमान के अनुसार उनकी दुकानों पर वर्ष 1998 से असलाह जमा हैं। लाइसेंस धारकों के वारिस अपने नाम पर नया लाइसेंस बनने का इंतजार कर रहे हैं ताकि वे अपने पिता का हथियार अपने नाम पर चढ़वा सकें। संवाद

किराया बनाम कीमत
वर्ष 2016 से पूर्व शासन ने किराया 100 रुपये प्रति माह प्रति असलाह तय किया था, जिसे बाद में 200 रुपये कर दिया गया। दुकानदारों का कहना है कि कुछ हथियार ऐसे हैं जिनकी मौजूदा बाजार कीमत दो हजार रुपये तक रह गई है, वहीं सेफ कस्टडी का किराया 55 हजार रुपये तक पहुंच चुका है।
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घट गई दुकानों की संख्या
कभी जिले में लगभग 20 शस्त्र की दुकानें हुआ करती थीं, लेकिन नियमों की जटिलता और लगातार घाटे के चलते अब केवल पांच ही गन हाउस शेष रह गए हैं। स्योहारा में देवरा गन हाउस व चौधरी गन हाउस, मैसर्स हरपाल एंड संस धामपुर, मैसर्स योगेश एंड संस चांदपुर, बिजनौर आर्म्स कारपोरेशन बिजनौर ही अस्तित्व में हैं।

देवरा आर्मरी स्टोर में जमा हथियार
135 एसबीबीएल, 118 डीबीबीएल, 32 रायफल व 19 रिवाल्वर।

चौधरी गन हाउस में जमा हथियार
100 एसबीबीएल, 200 डीबीबीएल, 41 रिवाल्वर व 19 पिस्टल।
लंबे समय से वारिसानों के शस्त्र लाइसेंस न बन पाने के कारण शस्त्र लाइसेंस धारकों के वारिसों को किराया देने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है। जिस तरह से राजस्व में भूमि संबंधी कागजात में वारिसान दर्ज हो जाता है, उसी आधार पर वारिसानों के शस्त्र लाइसेंस प्राथमिकता के आधार पर सरल तरीके से बनने चाहिए।

- डाॅ. विनीत देवरा, देवरा आर्मरी स्टोर, स्योहारा
काफी संख्या में आवेदन पेंडिंग हैं। सभी की नियमानुसार जांच कराई जाती है। इसके बाद ही लाइसेंस दिए जाते हैं। लॉ एंड ऑर्डर और चुनाव को देखते हुए सीमित संख्या में ही लाइसेंस बनाए जा रहे हैं।
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-जसजीत कौर, डीएम, बिजनौर
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