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रामभरोसे चल रहा अस्पताल

Thu, 30 Jun 2016 01:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला
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बिजनौर जिला अस्पताल में नेत्र परीक्षण केंद्र में लाइन में लगे मरीज। - फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में जिला चिकित्सालय में चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों के उपचार के दौरान कठिनाइयां पैदा होना लाजिमी है। अस्पताल में 11 चिकित्सकों के भरोसे 1500 मरीजों की ओपीडी है। मरीजों को उपचार के लिए घंटों लाइन में खड़े होकर अपनी बारी का प्रतीक्षा करना पड़ता है। नजीबाबाद और अफजलगढ़ के अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी है।
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सुबह आठ बजे : जिला चिकित्सालय खुलने से पहले ही मरीजों की भीड़ लगनी शुरू हो जाती है। मरीज पर्चा बनवाने के लिए लाइन में लगते हैं। मरीजों की भीड़ होने के कारण उन्हें पर्चा बनवाने में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। 
सुबह नौ बजे : चिकित्सक पहले वार्ड में भर्ती मरीजों को देखा। इसके बाद ओपीडी में मरीजों को देखने के लिए पहुंचे। इस दौरान काफी मरीजों की भीड़ लगी थी। मरीज भी अपनी बारी की प्रतीक्षा में घंटों खड़े रहे। कई मरीजों ने बताया कि चिकित्सकों और स्टाफ की कमी के कारण उन्हें काफी दुश्वारियां उठानी पड़ती है।
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सुबह 10 बजे : दवा लेने के लिए काउंटर पर भीड़ दिखनी शुरू होती है। महिलाओं को दो और पुरुषों को एक खिड़की पर दवाई वितरित की गई। 12 बजते ही अस्पताल मरीजों से खाली सा होने लगा।
एक्सरे कराने के लिए बैठा हूं
सड़क हादसे में घायल हुए इकबाल अहमद करीब 12 बजे एक्सरे रूम के सामने बैठे थे। बताया कि आधा घंटा पहले ही पर्चा बनवाया था। एक्सरे कराने के लिए बैठा हूं। 
नाश्ते की व्यवस्था भी होनी चाहिए
सर्जिकल वार्ड में भर्ती हरपाल ने बताया कि अस्पताल में दो समय का खाना मिल रहा है। नाश्ता नहीं मिलता है। नाश्ते की व्यवस्था भी होनी चाहिए। 
सीएमएस डा.आरके दुबे के मुताबिक मरीजों को सुविधा देने के लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। चिकित्सकों की कमी के कारण भीड़ लगना लाजिमी है। चिकित्सकों की छुट्टियों के बारे में उच्चाधिकारियों को बता दिया गया है।

एक कक्ष में बैठने को विवश तीन चिकित्सक
नजीबाबाद। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नजीबाबाद पर बुधवार को अमर उजाला ने मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की हकीकत जानी। यहां सबसे बड़ी समस्या जगह को लेकर है। कक्ष अभाव में तीनों चिकित्सक एक ही कक्ष में बैठकर मरीजों का परीक्षण करने पर विवश हैं। पिछले कई दिनों से वाहन उपलब्ध नहीं होने के कारण तीनों चिकित्सक अस्पताल पर ही बैठ रहे हैं। 
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बुधवार सुबह आठ बजे खुला। केंद्र प्रभारी डॉ.नरेंद्र  सिंह सहित सभी चिकित्सक अस्पताल पहुंच गए। 11 बजे तक 100 मरीजों का चिकित्सकों की टीम ने चेकअप कर उन्हें दवा उपलब्ध कराई। गांव पानाहीमपुर निवासी युवक गौतम कुमार की मलेरिया की आशंका के चलते सुबह नौ बजे ब्लड स्लाइड बनाई गई। संविदा चिकित्सकों में डॉ. गौरव गुप्ता, डॉ. रविंद्र कुमार व डॉ.कोनैन अली को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
रामभरोसे चल रही है व्यवस्था
अफजलगढ़। करोड़ों की लागत से बना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र निर्माण के दो दशक बाद भी चिकित्सकों व स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। अस्पताल मात्र एक चिकित्सक के सहारे रामभरोसे चल रहा है।
अस्पताल में वर्तमान में यहां सात डाक्टरों के पद सृजित हैं। एकमात्र जनरल फिजीशियन राजीव चौहान ही है। अस्पताल में छह वर्ष से रेडियोलजिस्ट, चार वर्ष से बाल रोग विशेषज्ञ, दस वर्ष से हड्डी रोग विशेषज्ञ, दस वर्ष से दंत रोग, नौ वर्ष से सर्जन, चार वर्ष से महिला रोग विशेषज्ञ के पद रिक्त पड़े हैं। चीफ फार्मेसिस्ट व वार्ड व्याय के पद भी खाली पड़े हैं।   
अस्पताल में 150 से लेकर 200 मरीज प्रतिदिन उपचार कराने आते हैं। पांच से 10 मरीज भर्ती भी रहते हैं। अस्पताल में भर्ती मरीज शिवचरन, लायबा, रूपा, शहाना, हेमलता, नसरीन, फरहीन, सोमती ने कहा कि उन्हें सारी दवाईयां अस्पताल से ही दी जाती है। उधर, इस बाबत चिकित्सक राजीव चौहान ने कहा कि कई बार इस बारे में लिखित व मौखिक रूप से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया, मगर समस्या का समाधान अभी तक नहीं हो सका।
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