गांव को रोशन करने में आड़े आ गए नियम
बिजनौर। शहरों की तर्ज पर गांवों को रोशन किया जाना था लेकिन नियम आड़े आ गए। जिला पंचायत द्वारा गांव में लाइट नहीं लगवाई जा सकी। जिसके चलते गांव जिला पंचायत की विकास की रोशनी से दूर ही रह गए।
शासन ने अक्तूबर 2021 में आदेश जारी करते हुए जिला पंचायतों को गांव में लाइट लगवाने के निर्देश दिए थे। तब उम्मीद जगी कि गांव अब रोशन हो जाएंगे। जिला पंचायत ने गांवों में लाइटें लगवाने के प्रयास शुरू किए। लेकिन जब मूल शासनदेश खंगाला गया तो पता चला कि गांव के अंदर जिला पंचायत पैसा खर्च नहीं कर सकती है। सिर्फ गांव के बाहर ही विकास कार्य कराए जा सकते हैं। जिसके बाद जिला पंचायतों ने गांव में लाइटें लगवाने के प्रयास बंद कर दिए। अब गांव में लाइट लगवाने का काम ठंडे बस्ते में चला गया।
जिले में लगवाई जानी थी 25 हजार लाइटें
जिले में गांव की संख्या दो हजार से अधिक है। शुरुआत में दस-दस लाइट लगवाने की योजना तैयार की। जिसमें तकरीबन 25 हजार लाइट लगवाई जानी थी। उधर, समय कम होने की वजह से भी लाइट कहां लगनी है, यह आंकलन भी नहीं हो सका।
इस बार हो सकता है विचार
जिला पंचायत के विकास कार्यों के मूल शासनादेश के अनुसार गांव में बजट नहीं लगाया जा सकता। जिसे स्पष्ट करने के लिए शासन को पत्र लिखा गया। इस साल इस पर स्पष्ट आदेश जारी हो सकता है। जिसके बाद जिला पंचायत बोर्ड की बैठ में प्रस्ताव पास कराया जाएगा।
वर्जन-
गांव में एलईडी लाइट लगवाने के लिए पिछले साल शासनादेश आया था। यह आदेश स्पष्ट नहीं हो पाया। एक आदेश कहता है कि गांव के अंदर विकास कार्य नहीं हो सकते हैं। बाद में तमाम अड़चनों की वजहों से गांव में लाइट नहीं लग पाई। - श्याम बहादुर शर्मा, एएमए