ऊंची हो रहीं सड़कें, नीचे पड़ रहे बाजार
बिजनौर। शहर में सड़कें ठीक करने के नाम पर उनके ऊपर नई परत डाल दी जाती है। बरसात में इस परत के उखड़ने का खतरा रहता है। ऊपर उठाकर सड़क बनाने के कारण कॉलोनियों के साथ दुकानें नीची पड़ती जा रही हैं। ऐसे में बरसात का पानी दुकानों और कॉलोनियों में भरने खतरा रहता है। हाईकोर्ट में ऐसी सड़कों के खिलाफ जनहित याचिका डाली गई है।
बिजनौर शहर में सड़कें बनाने के मामले में खूब अनदेखी की जा रही है। पीडब्लूडी की ओर से बनने वाली सड़क हों या फिर नगर पालिका की ओर से, ज्यादातर सड़क बनाने में गाइडलाइन का पालन नहीं किया जा रहा है। जो सड़क टूटी हैं, वहीं पर परत डाल दी जाती है। टूटी फूटी सड़कों पर के ऊपर रेत, बजरी की नई परत डाल दी जाती है। सड़क बनाने वाले ये नहीं देखते हैं कि ऊंची सड़कें होने से आसपास की दुकानों और मकानों को बरसात में खतरा पैदा हो जाएगा। बरसात के मौसम में दुकानों और कॉलोनियों में जलनिकासी की समस्या बनती है।
मोहल्ला नई बस्ती, सिविल लाइन का इलाका हो या मुख्य बाजार, सभी जगह की हालात बरसात में एक जैसी होती है। सिविल लाइन में गंगा नगर, नई बस्ती, पंचवटी कॉलोनी, मुख्य बाजार, चाहशीरी, राम का चौराहा में जलभराव रहता है। लेकिन इसकी किसी को भी इसकी परवाह नहीं है। लोक निर्माण विभाग की ओर से मुख्य मार्गों को दोबारा तोड़कर बनाया जाता है और शहर की सड़कों के ऊपर परत ही डाल दी जाती है। गंगानगर निवासी विकल महर्षि व गीता नगरी निवासी हिमांशु ने डीएम से भी इस बारे में शिकायत की है।
कहा है कि गीता नगरी, सिविल लाइन समेत शहर के अन्य इलाकों में सड़कों का जो निर्माण कराया जा रहा है, यहां सड़कों को ऊपर उठाकर बनाया जा रहा है। सड़क को उसी के लेबल में मानकों के अनुसार बनाने की उन्होंने मांग की। लेकिन इसके बाद भी कुछ नहीं हुआ। विकल महर्षि ने प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री से भी शिकायत की है। कहा है कि पीडब्लूडी की ओर से सड़कों का निर्माण किया जा रहा है। पुरानी सड़कों को तोड़कर उस पर आरबीएम डालकर पहले से ऊंची बनाई जा रही हैं। आबादी में इस तरह सड़कों का निर्माण होने से मोहल्लों में सड़क की तुलना में मकान गहराई में चले जाते हैं। बरसात में इन मकानों में बारिश का पानी भर जाता है। विकल महर्षि ने हाईकोर्ट में भी इसके खिलाफ जनहित याचिका डाली है।
हाईवे पर तोड़कर बनाई गई थीं सड़कें
बिजनौर शहर में पीडब्लूडी की ओर से शास्त्री चौक से सिविल लाइन में सड़क पर परत डाल दी गई है। इससे ये सड़क थोड़ी ऊंची उठ गई है। जबकि मंडावर मार्ग व नूरपुर मार्ग की हाईवे की जो सड़कें बनीं थीं उन्हें तोड़कर बनाया गया था। शहर की सड़कों को तोड़कर नहीं बनाया गया।
मेन हॉल जा रहे गहराई में
सड़कें ऊंची होने से सीवर लाइन के मेन हॉल भी गहराई में पहुंच रहे हैं। उनके ऊपर परत नहीं डाली जाती। जिससे मेन हॉल के ढक्कन गहराई में चले जाते हैं। कई बार दोपहिया वाहनों पर सवार लोग इनकी चपेट में आकर घायल हो जाते हैं। इसी तरह अगर सिविल लाइन के मेन हॉल गहराई में पहुंचते रहे तो इन्हें ऊपर उठाने में फिर से काफी मशक्कत करनी होगी।
नहीं होती कोई परेशानी
पीडब्लूडी के एक्सईएन सुनील सागर के मुताबिक शहर के अंदर हर तीन चार साल बाद पीडब्लूडी की सड़कों पर परत डाली जाती है। इससे बरसात में दुकानों व मकानों में पानी पहुंचने का कोई खतरा नहीं है। कहा कि सड़क किनारे नाले साफ होने चाहिए। जिससे सड़क का पानी नालों में चला जाता है। नाले अटे होंगे तब पानी बाहर आएगा। तीन साल बाद केवल ढाई सेंटीमीटर की परत डाली जाती है। हाईवे की सड़कों को तोड़कर बनाना जरूरी होता है।