ऐश्वर्य चौधरी उर्फ मौसम
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इनके अलावा पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह भी गांवों का दौरान करने में जुटे हुए थे। इनके अलावा दावेदारों की सूची में पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह, कविता चौधरी, रामेंद्र सिंह का नाम भी चर्चाएं भी चल रही थी।
अब जब से बिजनौर सीट नए गठबंधन के साथ रालोद के खाते में जाने की बात हुई तो यह सभी दावेदार परेशान होते दिख रहे हैं। इनमें से कई टिकट की दौड़ से बाहर होते दिख रहे हैं तो कुछ पार्टी के शीर्ष नेताओं से मिलकर दूसरी लोकसभा में अपने टिकट की उम्मीद तलाशने में जुट चुके हैं।
बाहरी नेता साध रहे संपर्क, रालोद के दावेदारों में बेचैनी
भाजपा-रालोद का गठबंधन और बिजनौर सीट पर रालोद के खाते में जाने की चर्चाओं से यहां के दावेदार भी परेशान हैं। अब रालोद बिजनौर सीट पर किस पर भरोसा जताती है, यह तो जल्द साफ हो जाएगा, लेकिन पिछले तीन दिन से बसपा से सांसद मलूक नागर द्वारा रालोद के शीर्ष नेताओं से संपर्क साधने की चर्चा तेज है।
इसके अलावा बिजनौर के राजनीतिक खेमे में रालोद से विधायक मदन भैया का नाम भी चर्चाओं है। ऐसे में बिजनौर से टिकट का दावा कर रहे डॉ. नीरज चौधरी भी शीर्ष नेताओं से संपर्क साध रहे हैं। इनके अलावा विधायक चंदन चौहान, पूर्व रालोद जिलाध्यक्ष ब्रजवीर सिंह चौधरी के नाम भी दावेदारों की सूची में है।
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सपा में अब रुचिवीरा की चर्चा तेज, कई हैं दावेदार
रालोद के सपा का हाथ छोड़ने की बात पक्की हुई तो सपा से टिकट मांग रही पूर्व विधायक रुचिवीरा का नाम अब सबसे आगे चलने लगा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं हैं कि सपा के टिकट पर बिजनौर लोकसभा से अब पूर्व विधायक रुचिवीरा ही चुनाव लड़ सकती हैं। इनके अलावा बिजनौर से सपा से डॉ. रमेश तोमर का नाम भी दावेदारों की सूची में है।
क्षेत्रीय कार्यक्रम में बसपा सांसद मलूक नागर
बिजनौर सीट पर दो बार गुर्जर और एक बार जाट प्रत्याशी जीत चुके
बिजनौर लोकसभा सीट का गठन 2009 में हुआ था। पहली ही बार में रालोद से संजय चौहान जो गुर्जर बिरादरी से रहे हैं, जीत गए थे। इसके बाद जाट बिरादरी से 2014 में भाजपा से भारतेंद्र सिंह इस सीट से सांसद बने। 2019 के चुनाव में भले ही पार्टी बदल गई हो, लेकिन गुर्जर बिरादरी से बसपा के सिंबल से चुनाव लड़े मलूक नागर ने जीत दर्ज की।