डायट में दो साल से चल रही थी धांधली
चांदपुर (बिजनौर)। जिला शिक्षा एंव प्रशिक्षण संस्थान इस्माइलपुर में हुए लाखों के घोटाले का मामला दो साल से चल रहा है और किसी को कानों कान खबर नहीं लगी। आशंका जताई जा रही है कि घोटाले की रकम और अधिक हो सकती है।
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान इस्माइलपुर में डायट के खाते से दो साल में प्राचार्य के हस्ताक्षर से करीब 60 लाख रुपये से ज्यादा की रकम एक बाबू के खाते में ट्रांसफर हो गई और किसी को भनक तक नहीं लगी। अब जब घोटाले का खुलासा हुआ तो संयुक्त शिक्षा निदेशक मनोज कुमार द्विवेदी ने संस्थान के दो बाबू को निलंबन का पत्र जारी कर दिया है। जिसमें एक बाबू इस्माइलपुर में ही तैनात था तथा एक बाबू का कुछ माह पूर्व ही अमरोहा ट्रांसफर हो चुका था। इस्माइलपुर में तैनात बाबू को डीआईओएस कार्यालय बिजनौर तथा एक को बीएसए कार्यालय अमरोहा में अटैच कर दिया गया है। प्राचार्य बिजेंद्र कुमार ने बताया कि अभी जांच जारी है। जांच पूरी होने पर सही स्थिति का पता चलेगा।
अफसरों पर भी उठ रहे सवाल
डायट में 60 लाख के गबन के मामले में भले ही दो कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई हो, लेकिन सवाल के घेरे में डायट के अधिकारी भी आ रहे हैं। एक ओर जहां अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि उन्हें तो इसकी भनक ही नहीं लगने दी गई, वहीं सवाल यह भी उठ रहा है कि बैंक से लगातार निकलते रुपयों का उन्हें कैसे पता नहीं चला। डायट में जिस रकम का घोटाला हुआ है, उसे विशिष्ट बीटीसी के चयनित अभ्यर्थियों की बताया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि 2009 में शिक्षक बनने के लिए विशिष्ट बीटीसी भर्ती के तहत अभ्यर्थियों ने आवेदन के साथ ड्राफ्ट दिए थे। इस रकम को डायट के खाते में जमा किया गया था।