दल के प्रभारी कुमार दीपक के अनुसार कालागढ़ में जून व जुलाई में 51 सांपों को कार्बेट नेशनल पार्क के घने जंगलों में आबादी से पकड़ कर छोड़ा गया। सांप शांत वातावरण में रहना पसंद करता है।
कालागढ़ में प्रत्येक मकान के आसपास रसोई बगीचे की जगह है। जिसमें पहले कर्मचारी सब्जी उगाया करते थे। वर्तमान में बड़ी संख्या में आवासों का ध्वस्तीकरण होने से उनका मलबा पड़ा हुआ है। झाड़ियां उग आई हैं। पहले लोग सांप को मार देते थे, लेकिन अब वन संरक्षण अधिनियम लागू होने और उसमें सांपों को संरक्षित प्रजाति में शामिल कर लेने के कारण कड़े दंड का प्रावधान है।
उधर कालागढ़ के उप प्रभागीय वन अधिकारी कुंदन सिंह खाती का कहना है कि बरसात के दिनों में बिलों में पानी भर जाने की वजह से जीव बाहर निकल आते हैं। कालागढ़ में आबादी कम होने की वजह से इन्होंने अपने बिल अधिक बना लिए हैं।
लॉकडाउन के दौरान सामान्य आवागमन कम होने से जीवों की निर्बाध विचरण करने की प्रवृत्ति भी बढ़ गई है। सांप भी अधिक घूम रहे हैं। सांप से बचाव के लिए वन विभाग ने विष निष्क्रिय किट चिकित्सालय में भी रखवा दी है। अपने घरों के आसपास की जमीन साफ रखने से ऐसे जीव घरों में प्रवेश नहीं करेंगे।
कार्बेट टाइगर रिजर्व के पार्क वार्डन रमाकांत तिवारी का कहना है कि सांप किसी को डस लेता है और उसकी मृत्यु हो जाती है तो सरकारी चिकित्सालय से प्रमाणित होने पर आश्रित परिवार को तीन लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने का प्रावधान है।