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पहाड़ों पर बारिश से नदियां उफनीं

Wed, 12 Jul 2017 11:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
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बढ़ापुर-तारापुर संपर्क मार्ग पर बहता नकटा नदी का पानी। - फोटो : अमर उजाला
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मंडावर/नगीना/बढ़ापुर में पहाड़ों पर हो रही बारिश से जिले की नदियां उफनने लगी हैं। बरसाती नदियों खो नदी और नकटा व गुलाह ने रौद्र रूप धारण करना शुरू कर दिया है। गंगा, नक्शा और खो नदी का पानी हजारों बीघा फसलों को जलमग्र कर चुका है। दो गांवों के रास्ते को नदी ने 25 फीट तक काट दिया है। जिला प्रशासन ने गांव वालों को इस रस्ते से न होकर जाने की हिदायत दी है। खादर में गंगा का कटान अब भी जारी है। नदियों का रौद्र रूप देखकर गांव वाले भी सहमे हुए हैं।
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पहाड़ों पर हो रही बारिश जिले के नदियों किनारे बसे गांवों के लिए आफत बन गई है। बारिश से नदियों ने रौद्र रूप धारण करना शुरू कर दिया है। नगीना में खो नदी का पानी नदी की धारा से बाहर आकर हजारों बीघा खेतों में भर गया है। गांव ब्राह्मणवाला, सारंगवाला आदि गांवों के खेतों में खड़ी धान आदि की फसल पानी में समा गई हैं। इन दोनों गांवों को जोड़ने वाली पक्की सड़क पानी के तेज बहाव से 25 मीटर तक कट गई है। नदी की तेज धारा व खेता में भरे पानी को देखकर गांव वाले सहमे हैं। तहसीलदार नवनीत गोयल, लेखपाल विपिन कुमार, राजेंद्र कुमार ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया। उन्होंने गांव वालों को उक्त रस्ते से दूर रहने की हिदायत दी है। हालांकि अभी किसी गांव में नदी का पानी नहीं भरा है। गांव वालों सुरेंद्र सिंह, विजेंद्र सिंह, साहब सिंह आदि का कहना है कि पहाड़ों पर तेज धारा के साथ पानी आने से खेतों में भर रहा है। यह पानी खेतों से होता हुआ काफी आगे जाकर फिर से खो नदी में ही समा जाता है।

मंडावर के खादर क्षेत्र में बरसात के बाद गंगा की धारा दो हिस्सा में बंट जाती हैं और बीच में सूखी जमीन का टापू सा बन जाता है। गंगा की धारा में किसानों की जमीन भी होती है। किसान इस जमीन पर खेती करते हैं। अगर बारिश कम होती है तो धारा के बीच में खड़ी फसलों को नुकसान नहीं होता है। इस बार पहाड़ों पर जोरदार बारिश हो रही है। बारिश के पानी से गंगा की धारा भी लबालब हो गई है। गंगा की धारा के बीच में बोई गई सैकड़ों बीघा फसल जलमग्र हो चुकी है। गंगा के तेज बहाव से ईख आदि फसल उखड़-उखड़कर बहनी शुरू हो गई है। किसान अपनी आंखों के सामने जमीन और फसलों को गंगा में समाते देख रहे हैं। लेकिन किसान कुछ भी करने से मजबूर हैं। जिन किसानों के खेत गंगा की धारा के दूसरी ओर हैं, वे किसान अपनी जान जोखिम में डालकर खेतों से नाव पर पशुओं के लिए चारा ला रहे हैं। किसानों किसानों राजेश कुमार, टीकम सिंह, धर्मवीर सिंह, ब्रह्मपाल सिंह, मनोज कुमार आदि के अनुसार खेत तो गंगा पार ही रहेंगे। किसान अगर खेती छोड़ते हैं तो करने के लिए कुछ और नहीं है। कई बार गंगा की धारा में हादसा होने से किसानों की मौत भी हो जाती है।
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बरसाती नदियों नकटा व गुलाह नदी का पानी पहाड़ों पर बारिश होने से खेतों में भर रहा है। कई गांवों के खेतों में इन नदियों में का पानी भर गया है। नकटा नदी का जल स्तर बढने पर नदी का पानी ग्राम तारापुर के खेतों से होकर गुजरा और पानी ने बढ़ापुर-तारापुर मार्ग क्षतिग्रस्त कर दिया है। पानी भरने से गांव मुकंदपुर राजमल, कुंजेटा, तारापुर, नूरपुर अरब, इस्लामगढ़, सादातपुर गढ़ी, चिलकिया, भाऊवाला, बरखेड़ा, शालीपुर कोटरा आदि गांवों का संपर्क कस्बे से कट चुका है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार गंगा में अभी 59 हजार 639 हजार क्यूसेक पानी चल रहा है। खतरे की स्थिति नहीं है।


रामगंगा बांध के  जलस्तर में 24 घंटे में दो मीटर की बढ़ोतरी
कालागढ़ में क्षेत्र में लगातार बारिश से रामगंगा बांध के जलाशय का जलस्तर 24 घंटो में दो मीटर बढ़ गया है। बारिश के कारण मौसमी नदियों में पानी आ गया। जिसकी वजह से कालागढ़ रामनगर और कालागढ़ कोटद्वार मार्ग पर आवागमन बंद हो गया है।
रात से ही क्षेत्र में बारिश जारी है। जिसकी वजह से स्कूल कालेजों में अवकाश रहा। इसके अलावा बाजारों में सन्नाटा छाया रहा। मौसमी नदियों सूखास्रोत, धारा, मीरास्रोत आदि में पानी आ गया। जिसकी वजह से मैदानी इलाकों में पानी की निकासी रही। रामगंगा बांध के कैचमैंट एरिया में बारिश अभी भी जारी है। जिसकी वजह से बांध के जलाशय का जलस्तर बढ़ रहा हैं। बुधवार शाम चार बजे बांध का जलस्तर 314.300 मीटर रिकार्ड किया गया। जबकि मंगलवार को यह स्तर 312.350 मीटर था।
रामगंगा बांध के नियंत्रण कक्ष से मिली जानकारी के अनुसार रामगंगा बांध और नदी के इलाके इलाके में भारी बारिश रिकार्ड की गई। कालागढ़ में दिन में 12 बजे तक 76.4 मिमी और शेरकोट के खो बैराज पर सुबह आठ बजे तक 100 मिमी बारिश रिकार्ड की गई। बांध के कैचमैंट एरिया में मारचूला में सबसे अधिक 102.8, नौला में 98, रानीखेत में 59.8, लैंसडान में 44, हरेवली में 60 मिमी बारिश रिकार्ड की गई। ईई रामबाबू के अनुसार बांध के कैचमैंट एरिया में बारिश जारी है। जिससे बांध के जलस्तर में वृद्धि हो रही है।

क्षतिग्रस्त रपटों की मरम्मत की प्रशासन से मांग 
मंडावली में  मोटा महादेव-भागूवाला बाईपास मार्ग के बीच नदियों के रपटों के ऊपर वर्षा का पानी बहने से यातायात घंटों प्रभावित रहा। ग्रामीणों ने सूक्खा नदी के क्षतिग्रस्त रपटा की मरम्मत कराने की मांग की है। 

बुधवार सुबह तेज वर्षा से टाटा रतन के पास सूक्खा नदी और जटपुरा बौंडा के पास लकड़हान नदी के रपटों के ऊपर से दो-तीन फीट ऊंचाई तक पानी घंटों तक चलता रहा। मोटा महादेव-भागूवाला बाईपास मार्ग श्रावण मास में हरिद्वार से नजीबाबाद दिशा को आने वाले कांवड़ियों का प्रमुख मार्ग है। हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौटने वाले कांवड़ियों के लिए मोटा महादेव मंदिर जलाभिषेक का पहला पड़ाव है। क्षेत्रीय ग्रामीणों शोकीन सिंह, मुन्नू सिंह, ओमकार सिंह, राजपाल सिंह, भूपेंद्र सिंह, बालेंद्र सिंह आदि का कहना है कि लोनिवि की उदासीनता से टाटा रतन के पास सूक्खा नदी के क्षतिग्रस्त रपटे को ठीक नहीं कराया गया। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि वर्षा अधिक होने से रपटा ध्वस्त हो सकता है। जिसके चलते कांवड़ियों को परेशानी झेलनी पड़ सकती है। उन्होंने प्रशासन से क्षतिग्रस्त रपटे की शीघ्र मरम्मत कराने की मांग की है।
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