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ब्लॉक में पंचायतों के आरक्षण की प्रक्रिया शुरू

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ब्लॉक में पंचायतों के आरक्षण की प्रक्रिया शुरू
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बिजनौर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में प्रधान, ग्राम, क्षेत्र व जिला पंचायत, सदस्यों के लिए वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया शनिवार से ब्लॉक स्तर पर शुरू हो गई है। आरक्षण नीति से उन मठाधीश दावेदारों की नींद उड़ी है, जो जुगाड़बाजी से मनपसंद पंचायतों को आरक्षित होने से बचा लेते थे। जिले में सैकड़ों पंचायत ऐसी बताई जा रही हैं जो लंबे समय से आरक्षित नहीं हुई हैं।
शासन की आरक्षण नीति में कहा गया है कि वर्ष 1995 से वर्ष 2015 तक आरक्षण से वंचित पंचायत अब पहले आरक्षित होंगी। प्रशासन ने आरक्षण नीति का कड़ाई से पालन करने की व्यवस्था की है। जरा सी भी कोताही भारी पड़ सकती है। शासन ने पंचायतों के जातिवार आंकड़े, 1995 से 2015 तक के चुनावों में विभिन्न वर्ग में आरक्षित रही पंचायतों आदि का विवरण पहले ही इकट्ठा कर रखा है। जिला स्तर पर 19 फरवरी को बीडीओ व एडीओ का आरक्षण प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया गया था।
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20 फरवरी शनिवार से ब्लाक स्तर पर आरक्षण प्रक्रिया शुरू हो गई है। ब्लॉक से मिल रही जानकारी के अनुसार शनिवार सुबह से ही त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के दावेदारों की आवाजाही होने लगी है। दावेदार अपनी पंचायत की आरक्षण स्थिति जानने को बेताब है। सबसे अधिक मारामारी प्रधान पद का आरक्षण जानने को लेकर है। जिले में 1123 पंचायत हैं। इनमें प्रधान के लिए 740 पंचायत विभिन्न केटेगरी में आरक्षित होनी हैं।
बताया गया है कि सबसे अधिक परेशानी उन मठाधीश दावेदारों में है जो अब तक राजनीतिक पैतरेबाजी या जुगाड़बाजी से अपनी पंचायतों को आरक्षित होने से बचाते रहे हैं। आरक्षण नीति के अनुसार अब वंचित पंचायत पहले आरक्षित होंगी। सूत्रों के अनुसार जिले में सैकड़ों पंचायत आज तक आरक्षण से वंचित हैं। इनमें 2015 में नई बनने वाली पंचायत सबसे अधिक हैं।
सीडीओ केपी सिंह ने जिले के बीडीओ वह एडीओ पंचायत को सख्त हिदायत दी है कि आरक्षण पूरी निष्पक्षता और सतर्कता पूर्वक किया जाए। शासन के निर्देश का अक्षरश: पालन हो। इसके बाद से ब्लॉक स्तर पर सख्ती बरती जा रही है। आरक्षण में लगे अधिकारी व कर्मचारी ग्रामीणों से नहीं मिल रहे हैं। किसी को भी आरक्षण स्थल की ओर फटकने नहीं दिया जा रहा है।
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वर्ष 2015 के मुकाबले चार पंचायत कम आरक्षित होंगी
बिजनौर। वर्ष 2021 के निर्वाचन में वर्ष 2015 के आरक्षण के मुकाबले प्रधान की चार ग्राम पंचायत कम आरक्षित होंगी। वर्ष 2015 के चुनाव में 744 पंचायत प्रधान के लिए आरक्षित हुई थी। जिले में परिसीमन के कारण पांच पंचायत कम होकर 1128 की जगह 1123 रह गई हैं। हल्दौर ब्लॉक में पांच पंचायत कम हुई हैं। इससे पंचायतों की आरक्षण संख्या पर असर पड़ा है। वर्ष 2021 में प्रधान की 740 पंचायत आरक्षित होनी हैं।
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