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विदुरकुटी से पर्यटकों को जोड़ने की तैयारी शुरू

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विदुरकुटी से पर्यटकों को जोड़ने की तैयारी शुरू
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बिजनौर। विदुरकुटी पर पर्यटन से जोड़ने के रास्ते की तलाश में डीएम उमेश मिश्रा, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट विक्रमादित्य सिंह मलिक विदुर आश्रम पहुंचे। वहां पर्यटन की संभावनाओं के विकल्प भी देखे। देखा कि किस तरह पर्यटकों को इस जगह से लुभाया जा सकता है। इसके अलावा विदुर वाटिका की जमीन का निरीक्षण भी किया और उस पर योजनाबद्ध तरीके से पौधरोपण करने की जानकारी वन विभाग से ली गई। सात जुलाई से यहां पर पौधरोपण होना है।
सोमवार को डीएम उमेश मिश्रा, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट विक्रमादित्य सिंह मलिक, डीएफओ विदुरकुटी पहुंचे। वहां महात्मा विदुर का आश्रम, मंदिर, पुस्तकालय आदि को देखा। इसके अलावा विदुरकुुटी के सामने जमीन को भी देखा, जिस पर विदुर वाटिका बननी है। करीब 50 हेक्टेयर जमीन पर यह वाटिका बननी है, जिसमें करीब दो हेक्टेयर जमीन में औषधीय पौधे भी लगाए जाएंगे। इसके अलावा डीएम उमेश मिश्रा ने वन विभाग के अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों से यहां पर पर्यटन को बढ़ाने के विकल्प तलाशने के निर्देश भी दिए। ताकि पर्यटक आएं तो उन्हें यहां घूमने, पौराणिक महत्व समझने, रुकने आदि में समस्या न हो।
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विदुरकुटी के बथुए को है वरदान
महाभारत काल में कौरवों के पकवान छोड़कर भगवान श्रीकृष्ण महात्मा विदुर की कुटी में आए थे। कहा जाता है कि महात्मा विदुर ने यहां बथुए का साग बनाकर भगवान श्रीकृष्ण को खिलाया था। आज भी महात्मा विदुर के आश्रम के आसपास बथुए के पौधे, पेड़ दिखते हैं। कहा यहां तक जाता है कि 12 महीने यहां बथुआ उगता है। कुछ कथुए के पौधे काफी बड़े हो जाते हैं। जिले में केवल एक यही ऐसी जगह है, जहां हर समय बथुए के पौधे पनपते रहते हैं।
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कोट
मैने विदुरकुटी का निरीक्षण किया। वहां पर्यटन की संभावनाओं के विकल्प पर प्रशासनिक अफसरों के साथ चर्चा की जा रही है और योजनाबद्ध तरीके से यहां कार्य कराए जाएंगे। विदुर वाटिका जहां बननी है, उस जमीन को भी देखा।
- उमेश मिश्रा, डीएम, बिजनौर
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