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Bijnor News: शुगर बाउल में अब आलू की खेती से होगा मुनाफा

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ब्रजवीर चौधरी
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बिजनौर। शुगर बाउल के नाम से पहचान रखने वाले बिजनौर जनपद में अब आलू की खेती को बढ़ावा देने की तैयारी है। गन्ने पर किसानों की निर्भरता कम करने और फसल चक्र को प्रोत्साहित करने के लिए शासन और उद्यान विभाग की ओर से जिले में आलू का क्षेत्रफल बढ़ाया जाएगा। इसके लिए आलू उत्पादक किसानों को योजनाओं का लाभ दिलाने के साथ उत्पादन, भंडारण और विपणन को बढ़ावा दिया जाएगा।

जनपद में करीब 2.65 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की खेती होती है। यहां गन्ना किसानों की प्रमुख नकदी फसल है। हालांकि, लगातार एक ही फसल पर निर्भरता कम करने के लिए किसानों को अन्य फसलों की ओर भी प्रेरित किया जा रहा है। वर्तमान में जिले में करीब 30 हजार हेक्टेयर में आलू की खेती होती है। इस क्षेत्रफल को और बढ़ाने की तैयारी है। आलू उत्पादकों के लिए शासन ने विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को नया पोर्टल शुरू किया है। योजना के तहत किसानों को सहायता देने के साथ उचित मूल्य दिलाने के प्रयास होंगे। बाजार भाव गिरने की स्थिति में किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए भाव स्थिरता कोष की भी व्यवस्था की गई है। निजी शीतगृहों में भंडारित आलू पर भंडारण प्रभार में छूट के लिए अनुदान का प्रावधान भी है।
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आलू की खेती से मिट्टी को लाभ



नगीना अनुसंधान, वेधशाला केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. केके सिंह ने बताया कि आलू की खेती में खेत की अच्छी जोताई और मिट्टी की गुड़ाई होने से भूमि भुरभुरी रहती है। फसल के अवशेष मिट्टी में मिलाने से जैविक पदार्थ बढ़ता है। फसल चक्र अपनाकर आलू की खेती करने से मिट्टी की संरचना, जलधारण क्षमता और पोषक तत्वों का संतुलन बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है।
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वर्जन

किसानों को किया जाएगा प्रोत्साहित : डीएचओ

जिला उद्यान अधिकारी (डीएचओ) सतेंद्र पाल मान ने बताया कि आलू का क्षेत्रफल बढ़ाने के लिए किसानों को योजनाओं की जानकारी देकर प्रोत्साहित किया जा रहा है। उत्पादन के साथ भंडारण और विपणन की सुविधाओं पर भी जोर दिया जाएगा।



-आलू की खेती के लाभ



फसल चक्र में बदलाव से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद।

कम अवधि की फसल होने से खेत जल्दी खाली होता है।



अतिरिक्त आय का किसानों को अवसर मिलता है।

भंडारण की सुविधा से बेहतर भाव मिलने तक उपज सुरक्षित रखी जा सकती है।



सरकारी योजनाओं और अनुदान से उत्पादन व भंडारण लागत का बोझ कम हो सकता है।
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