बिजनौर के गंज दारानगर के पास गंगा में पलेज लगाने की तैयारी करता मजदूर।
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विदुर कुुटी के सामने पलेज की बुवाई शुरू
गंज दारानगर। गंगा शुद्ध और निर्मल बनाने के अभियान को लेकर जल्दी बिजनौर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गंगा यात्रा का शुभारंभ करेंगे। लेकिन गंगा को निर्मल बनाने की कवायद को पलेज की बुवाई पलीता लगा रही है। विदुर कुटी गंगा घाट के सामने खाली पड़ी सैकड़ों बीघे जमीन में बुवाई के लिए कीटनाशक और रासायनिक खादों का इस्तेमाल जमकर किया जा रहा है। पलेज की बुवाई में कीटनाशक और गंदे खाद का प्रयोग नहीं रोका गया तो सरकार के तमाम प्रयास बेनतीजा साबित होंगे।
गंगा का जलस्तर कम होने के बाद गंगा की काफी जमीन खाली हो जाती है। गंगा का बहाव कम होने के साथ ही गंगा किनारे और बीच में रेतीली जमीन पर सब्जी उगाई जाती है। लखपत नगर उर्फ लख्खीवाला, दारानगर, गंज ,निजामतपूरा, जहानाबाद सहित दर्जनों ऐसे गांव हैं। जहां सैकड़ों बीघा गंगा की रेतीली जमीन खाली पड़ी हुई है । यह जमीन सरकारी है लेकिन इस जमीन पर कुछ लोगों द्वारा पलेज लगाई जाती है। लोगों के अनुसार यहां जमीन दलालों द्वारा प्रति बीघा ढाई से तीन हजार रुपये में क्षेत्रीय ग्रामीणों को दी जाती है। सब्जी की बुवाई शुरू हो गई है। जिसकी बुवाई में मुर्गी फार्म से निकलने वाला खाद, कीटनाशक और रासायनिक खादों का इस्तेमाल किया जाता है। सब्जी आने पर कीटनाशक का स्प्रे भी किया जाता है। सब्जी उगा लेने के बाद यह कीटनाशक और खाद गंगा की रेतीली जमीन में ही रह जाता है। जबकि सरकार गंगा को निर्मल और स्वच्छ बनाने का प्रयास में लगी हुई है। लेकिन इस ओर वन विभाग पर लगाई जा रही पलेज को जिम्मेदार अफसर इस तरफ से आंखें मूंदे बैठे हैं । ग्रामीणों का कहना है कि सब्जी पलेज में प्रयोग होने वाले रासायनिक खाद कीटनाशक दवाइयां जलीय जंतुओं के लिए भी घातक साबित होती हैं । रेंजर शरद गुप्ता का कहना है कि गंगा की जमीन में पलेज की खेती नहीं होने देंगे। पलेज बोने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बिजनौर के गंज दारानगर के पास गंगा में पलेज में डालने के लिय बुग्गी में भरा खाद।- फोटो : BIJNOR