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उपद्रव के पीछे था पीएफआई का खतरनाक मंसूबा

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उपद्रव के पीछे था पीएफआई का खतरनाक मंसूबा
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बिजनौर। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) ने सीएए की आड़ में जिले को दंगे की आग में झोंकने का खतरनाक मंसूबा पाल रखा था। शहर से छोटे कस्बे पीएफआई के निशाने पर थे। इसके लिए पीएफआई ने फंडिंग के जरिए तमाम लोग तैयार किए थे। पुलिस ने ऐसे 25 लोग चिह्नित किए हैं, जो पीएफआई से जुड़े हैं। इनमें एक राजनीतिक दल का पूर्व जिलाध्यक्ष भी बताया जा रहा है। पुलिस ने करीब 12 लोगों को हिरासत में ले रखा है।
20 दिसंबर को नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में जिले भर में प्रदर्शन के नाम पर जमकर बवाल हुआ था। नहटौर में गोली लगने से दो लोगों की मौत हुई थी। कई वाहनों में आग लगा दी गई थी। पुलिसवाले सहित कई लोग घायल हुए थे। बवाल कराने में पीएफआई द्वारा फंडिंग की बात सामने आने पर गहनता से जांच कराई गई। कई बैंक खातों की डिटेल खंगाली गई। यह भी पता चला कि 100 से ज्यादा लोगों को यह रकम पहुंचाई गई। बिजनौर जिले में निसारूद्दीन पीएफआई से जुड़ा है। निसारूद्दीन व उसके सहयोगियों ने लोगों को रकम बांटने में अहम भूमिका निभाई।
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पुलिस की जांच में यह बात सामने आ गई है कि पीएफआई ने जिले में दंगा कराने की बड़ी साजिश रची थी। पुलिस यह पता करने में जुुटी है कि किन लोगों का कस्बे में दंगा कराने का दिमाग था। कौन कौन लोग इनसे जुड़े थे। अब तक 25 लोग पुलिस ने चिह्नित किए हैं और 12 लोगों से पूछताछ की जा रही है।
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एसपी संजीव त्यागी ने बताया कि जांच में यह बात सामने आई है कि बवाल कराने में पीएफआई की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अभी भी कुछ लोगों को भड़काकर जिले में माहौल खराब करने की साजिश रच रहे हैं। इन सब पर पुलिस की नजर है। अभी तक 25 लोगों को पुलिस ने चिह्ति किया है। पीएफआई से जुड़े उन लोगों के नाम भी सामने आ रहे हैं जिन पर बवाल के दौरान मुकदमे दर्ज हुए थे। इनमें कई लोग पीएफआई से जुड़े पाए गए हैं।
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