बिजनौर। बेटियों को लेकर लोगों की सोच में काफी परिवर्तन हुआ है।कोई अपनी बेटी को पढ़ा लिखाकर डॉक्टर बनाना चाहता है तो कोई किसी ने खेलों में आगे बढ़ने के लिए अपनी बेटियों को प्रोत्साहित किया है। बेटियां भी अलग अलग क्षेत्रों में आगे बढ़कर अपने माता-पिता और जिले का नाम देश विदेश में रोशन करना चाहती हैं। आज बेटी दिवस है। प्राचीन समय में लोग बेटियों की शिक्षा के प्रति उतने जागरुक नहीं थे, लेकिन अब जमाना बदल गया है। माता-पिता ने भी बेटियों को पढ़ा लिखाकर काबिल बनाने की सोच को आगे बढ़ाया है, तो बेटियां भी माता-पिता के इस नजरिए का सम्मान करते हुए पढ़ लिखकर कुछ कर दिखाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं। इसी विषय पर हमने कुछ बेटियों से बातचीत की-----
मोहल्ला भरत विहार कॉलोनी निवासी अरुण वर्मा की सुपत्री गरिमा वर्मा ने इंटर तक पढ़ाई मॉडर्न एरा पब्लिक स्कूल से की। वह महर्षि मार्केंडेश्वर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल सोलन हिमाचल प्रदेश की एमबीबीएस अंतिम वर्ष की छात्रा है। वह बचपन से ही डॉक्टर बनना चाहती थी। पापा अरुण वर्मा ने बेटी का हौसला बढ़ाते हुए मेडिकल क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। गरिमा बताती हैं कि वह अपने परिवार और आसपास में बीमार लोगों की हालत देखती थीं तो वह डॉक्टर बनकर ही जरूरतमंदों की सेवा करना चाहती थीं। आगे चलकर वह पीड्रियाट्रिशियन यानी बाल रोग विशेषज्ञ बनकर सरकारी सेवाओं में जाना चाहती हैं।
ग्रेटर नोएडा के बैक्सन होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज की बीएचएमएस फाइनल में अध्ययनरत छात्रा अफीफा कौसर का कहना है कि वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान है। मोहल्ला काजीपाड़ा निवासी पिता कौसर अता उर्फ बिट्टू जिला टीबी अस्पताल में एक्स-रे टैक्नीशियन हैं और माता डीडीपीएस स्कूल में शिक्षिका हैं। हाईस्कूल और इंटर की शिक्षा उसने डीडीपीएस स्कूल से प्राप्त की। इनकी माता नजमुस्सहर डीडीपीएस में शिक्षिका हैं। अफीफा ने बताया कि वह होम्योपैथिक चिकित्सा के क्षेत्र में उच्च शिखर तक पहुंचकर नाम रोशन करना चाहती है।
गांव स्वाहेड़ी निवासी अमित कुमार की होनहार पुत्री ख्याति चौधरी वर्तमान में मॉर्डन एरा पब्लिक स्कूल की हाईस्कूल की छात्रा हैं। ख्याति ने भारत सरकार की ओर से आयोजित खेलो इंडिया क्वालीफाई कर जगह बनाई और फाइनल राउंड में चौथे नंबर पर रही। अब महाराष्ट्र में चल रही उसकी पढ़ाई का पूरा खर्च करीब पांच लाख रुपये सरकार वहन करेगी। इसके अलावा प्रतिमाह उसे दस हजार रुपये स्कॉलरशिप के रूप में मिलते हैं। ख्याति ने बताया कि वर्ष 2017 से नेहरू स्पोर्ट्स स्टेडियम के शूटिंग कोच सैयद सादिक अनीस से निशानेबाजी में गुर सीखे। लॉकडाउन में स्टेडियम में नियमित अभ्यास न कर पाने के कारण उसके पिता ने घर पर ही शूटिंग रेंज तैयार कराई। ख्याति ने अब तक स्टेट इंटर स्कूल में गोल्ड, स्टेट में सिल्वर, प्री नेेश्नल में गोल्ड और नेशनल खेलकर यूपी टीम में ब्रांज मेडल जीता था। वर्तमान में वह ऑल इंडिया लेबल पर अंडर-17 में छठीं रैंक की निशानेबाज है।
बिजनौर की ही रहने वाली सामिया मेहर इंडिया टीम में ट्रायल दे रही है। इंडियन शूटिंग स्कॉड यानी इंडियन टीम में शामिल होने के लिए यह पहला पायदान होता है। दिसंबर में भोपाल में नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में ब्रांज मेडल जीता था। करीब तीन साल निशानेबाजी में हाथ आजमाने शुरू किए थे। सामिया ने बताया कि उसकी निशानेबाजी से प्रभावित होकर दो साल पहले महाराष्ट्र के आईएएस अधिकारी विजय वागमरे ने शूटिंग एयर रायफल भेंट की थी। वह यूपी शूटिंग टीम में जूनियर और यूथ कैटेगरी में निशानेबाज है। ओवरऑल अब तक 22 मेडल जीते हैं। इनमें 18 गोल्ड, तीन सिल्वर, एक ब्रांज मेडल शामिल है। सामिया का लक्ष्य 2024 में पेरिस ओलंपिक खेलों में नाम रोशन करना है। चार बहन भाइयों में तीसरे नंबर की सामिया महाराष्ट्र के पूना स्थित मॉडर्न कॉलेज में बीए प्रथम वर्ष की छात्रा है। वह वहीं पर निशानेबाजी के लिए भी तैयारी कर रही है।
ख्याति चौधरी।- फोटो : BIJNOR
गरिमा वर्मा।- फोटो : BIJNOR
सामिया मेहर।- फोटो : BIJNOR