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कोरोना के डर से मानसिक तनाव में आ रहे लोग

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कोरोना के डर से मानसिक तनाव में आ रहे लोग
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बिजनौर। कोरोना लगातार बढ़ रहा है। जिस कारण कुछ लोग कोरोना फोबिया के शिकार होकर मानसिक तनाव से ग्रस्त हो रहे हैं। लोगों को डिप्रेशन और घबराहट जैसी शिकायतें हो रही हैं। चिकित्सकों के अनुसार कोरोना के डर के कारण लोग मानसिक तनाव का भी शिकार हो रहे हैं। इससे बचने के लिए सकारात्मक सोच और कोविड-19 की गाइड लाइन का पालन करना है।
कोरोना वायरस के डर से कुछ लोग सो तक नहीं पा रहे हैं। डिप्रेशन और घबराहट के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। कुछ लोग अपने परिवार की सेहत को लेकर बेहद ही चिंतित हैं, तो कुछ को खुद के संक्रमित होने के डरे हुए हैं।
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जिला अस्पताल के फिजीशियन राधेश्याम वर्मा के अनुसार करीब दो माह से जिले में कोरोना के मामले तेजी से मिल भी रहे हैं और ठीक उससे अधिक तीव्रता से हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि करीब पांच महीने से घरों में बैठे लोगों में अकेलेपन, खालीपन और संक्रमण के डर के कारण डिप्रेशन और घबराहट की स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने बताया कि रोजाना आइसोलेशन ओपीडी में आने वाले लगभग बीस फीसदी से ज्यादा लोग ऐसे हैं, डर के कारण ठीक से नींद भी पूरी नहीं कर पा रहे हैं। जनपद में डिप्रेशन के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
जिला अस्पताल के सीएमएस ज्ञानचंद बताते हैं कि लोगों में मनोवैज्ञानिक समस्याएं काफी तेजी से बढ़ रही हैं। ये भयंकर मानसिक स्वास्थ्य संकट की शुरुआत भर है। कोरोना वायरस करीब 30 फीसदी लोगों का दिमागी संतुलन खराब कर कर रहा है। जब लोगों को अपने करीबी, पहचान वाले, साथ में काम करने वाले या घर के आसपास किसी के संक्रमित होने की जानकारी मिलती है, तो घबराहट बहुत ज्यादा होने लगती है।
ईएनटी सर्जन सुभाष राणा ने बताया कि वर्तमान में कोरोना को लेकर हर आदमी तनाव में हैं। उनके अस्पताल में आने वाले अधिकांश मरीजों की संख्या ऐसी है कि उनके गले में कोई बहुत बड़ी दिक्कत है। मामूली समस्या को भी वे कोरोना से जोड़कर देखते हैं, तो इससे समस्या बढ़ने लगती है। चिंता और घबराहट के कारण लोगों में नींद न आने और तेजाब बनने की समस्या आम हो गई है। घर का कोई सदस्य, घर पर काम करने वाला कर्मचारी, किसी पड़ोसी या दफ्तर के साथ के व्यक्ति के कोरोना पॉजिटिव निकलने पर लोग और अधिक परेशान हो उठते हैं। उन्हें लगता है कि अब इस महामारी की चपेट में वे भी आ सकते हैं।
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कोरोना के नोडल अधिकारी एसके निगम का कहना है कि वह स्वयं अपने परिवार सहित इस बीमारी की चपेट में आ गए थे, लेकिन उन्होंने कभी भी स्वयं और अपने बच्चों के दिलो दिमाग पर कोरोना को हावी नहीं होने दिया। वह नोडल अधिकारी और जिला सर्विलांस अधिकारी होने के नाते अक्सर कोरोना पॉजिटिव मरीजों के बीच जाते रहते हैं। इसी कारण वह संक्रमित हो गए थे और पत्नी, बेटी भी इसकी चपेट में आ गए थे। परिवार की सेहत को लेकर उन्हें चिंता तो रहती थी, लेकिन इस बात का परिजनों को एहसास नहीं होने दिया। उनका मानना है कि करीब 40 फीसदी लोग ऐसे हैं, जिनका दिमाग कोरोना वायरस से संक्रमण के बारे में ख्याल आते ही अस्थिर हो जाता है। मगर ऐसा करने से बचें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
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