फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गुड़ बनाने के लिए अलग लाइसेंस की बाध्यता समाप्त

विज्ञापन
विज्ञापन
गुड़ बनाने के लिए अलग लाइसेंस की बाध्यता समाप्त
विज्ञापन

बिजनौर। शासन ने लघु उद्योग को बढ़ावा देने के लिए खांडसारी इकाईयों को राहत दी है। अब खांडसारी इकाईयों को गुड़ आदि उत्पाद बनाने के लिए अलग से लाइसेंस नहीं लेना होगा। इससे गुड़ का उत्पादन बढ़ेगा और सरकार के राजस्व में भी वृद्धि होगी।
जिले में आगामी गन्ना पेराई सत्र के लिए 40 नए लाइसेंस जारी हो गए हैं। खांडसारी इकाईयां अक्टूबर से पेराई शुरू कर देती है। रिकवरी बढ़ने के साथ खांडसारी चीनी का उत्पादन करने लगती है। संचालक इकाइयों को शुरू करने की तैयारी में जुट गए हैं।
विज्ञापन

सहायक चीनी आयुक्त डीपी मौर्य ने बताया कि इकाईयों की संख्या बढ़ने पर गन्ने की अधिक पेराई होगी। जिले में इस साल गन्ने का रकबा करीब 11 प्रतिशत बढ़ा है। कहा कि पहले इकाई संचालकों को गुड़ बनाने के लिए अलग से लाइसेंस लेना होता था। व्यापारियों को लाइसेंस लेने के लिए लखनऊ-बरेली के चक्कर काटने पड़ते थे। अब गुड़ का अलग लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं है। गुड़, शीरा, राब आदि उत्पाद तैयार कर सकेंगे।
- जिले के जैविक गुड़ की विदेश में मांग
बिजनौर। जिले की खांडसारी इकाई बड़ी मात्रा में गुड़ तैयार करती है। जिले से गुड़ राजस्थान, दिल्ली, बिहार ,गुजरात आदि राज्यों को सप्लाई होता है। बिहार में राब की काफी मांग है। इतना ही नहीं किरतपुर क्षेत्र की इकाइयों पर बना जैविक गुड़ देश विदेश में बिकता है।
बिजनौर जैसी तीन चीनी मिल के बराबर गन्ना पेरेंगी
बिजनौर। शासन की नई नीति से खांडसारी इकाई की संख्या बढे़गी। इकाईयां अधिक गन्ना पेरेंगी। अनुमान है कि अगले सत्र में इकाईयां बिजनौर जैसी क्षमता वाली तीन चीनी मिलों के बराबर गन्ना पेरेंगी।
विज्ञापन

डीएम ने अवैध इकाईयों की जांच के निर्देश दिए
बिजनौर। सहायक चीनी आयुक्त ने बताया कि डीएम रमाकांत पांडेय के निर्देश पर अवैध खंडसारी इकाइयों की जांच के लिए टीम बनाई गई है। नई इकाई चीनी मिल से साढे़ सात किलोमीटर की दूरी पर लग सकती है। पहले यह दूरी 15 किलोमीटर थी। निरीक्षण में तीन खांडसारी इकाई नियम विरुद्ध लगी मिली हैं। इन्हें हटवा दिया गया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें