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लोग नहीं हो रहे बीमार, ठप हुआ दवाई का कारोबार

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लोग नहीं हो रहे बीमार, ठप हुआ दवाई का कारोबार
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बिजनौर। लॉकडाउन में अच्छा खाना और संयमित रहने का एक नतीजा ये भी है कि दवा कारोबार पर बुरा असर पड़ा है। दवा कारोबार पर करीब 60 फीसद कमी दर्ज की गई है। जो कारोबार है उसमें भी 25 फीसदी से अधिक बीपी, हार्ट, शुगर की दवाओं का सहारा है। लॉकडाउन में मौसमी बीमारियों की दवा की बिक्री पूरी तरह से ठप है, सिर्फ 25 फीसद में बिक्स, बाम, विटामिन, पेनकिलर दवा की बिक्री हो रही है। चिकित्सकों का कहना है कि एंटी बायोटिक दवाओं के साथ दर्द, गैस्ट्रो और विटामिन की दवाओं की बिक्री आमतौर पर एक साथ होती है, लेकिन इन दिनों अधिकांश लोग अपने अपने घरों में कैद हैं। ऐसे में इन दिनों यह दवा बहुत कम खरीदी जा रही है।
जिले में प्रतिदिन लगभग डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का दवा कारोबार होता है, जो अब 40 फीसदी तक आकर सिमट गया है। लॉकडाउन होने की वजह से लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। इससे सड़क दुर्घटना भी नहीं हो रही है, जबकि हमारे यहां सबसे अधिक सड़क दुर्घटना में घायल होने वालों की संख्या है। इनके उपचार पर भी दवाओं का होने वाला खर्च पूरी तरह से ठप है। इसके अलावा लॉकडाउन में प्रसव के लिए ही ऑपरेशन हुए हैं। नर्सिंग होम एवं हॉस्पिटल भी नाममात्र को ही चल रहे हैं। अन्य तमाम तरह की बीमारियों को लेकर होने वाले ऑपरेशन भी बंद हैं।
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पर्यावरण ठीक होने से भी पड़ा असर
आईएमए के अध्यक्ष डॉ. सुभाष राणा का कहना है कि वर्तमान में पर्यावरण भी ठीक हो गया है। ऐसे में सबसे अधिक फायदा तो सांस के मरीजों को हुआ है। बहुत से ऐसे मरीज हैं, जिन्होंने दवा खाना ही बंद कर दिया है। वह पूरी तरह से स्वस्थ महसूस कर रहे हैं, नहीं तो आम दिनों में सांस के मरीजों की दवा ही अच्छी खासी बिकती थी।
खानपान सही होने से दूर हुई बीमारियां
आईएमए सचिव डॉ. राहुल देशवाल का कहना है कि गर्मियों में रोगियों को पहले से ही बाहर का खाना, जंक फूड आदि के लिए मना किया जाता था, लेकिन इस बार लॉकडाउन की वजह से लोग इस तरह का खाना नहीं खा पा रहे हैं। इससे मौसम के साथ होने वाली बीमारी थम गई हैं।
दवा बिक्री में हुई 60 फीसदी की कमी
जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट फेडरेशन के जिलाध्यक्ष नवीन भारद्वाज ने बताया कि जिले में लगभग तीन हजार से भी अधिक मेडिकल स्टोर हैं। यहां पर प्रतिदिन लगभग डेढ़ करोड़ से भी अधिक दवा का कारोबार होता है, लेकिन लॉकडाउन की वजह से दवा कारोबार में करीब 60 फीसद कमी दर्ज की गई है। इमरजेंसी में सिर्फ बीपी, हार्ट, शुगर की दवा ही खरीदी गई है।
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मौसमी बीमारियां थमने से हुई गिरावट
कोषाध्यक्ष अवधेश चौहान का कहना है कि लोग घरों से बाहर निकल नहीं रहे हैं, जिसकी वजह से मौसमी बीमारी भी शांत हैं। इस सीजन में अभी तक हमने एक भी ग्लूकोज की बोतल नहीं बेची है। आमतौर पर अप्रैल से ही डायरिया फैलता था, लेकिन अभी तक एक मरीज नहीं आया है। सिर्फ बीपी, शुगर, हार्ट की दवा ही सेल हो रही है।
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