बिजनौर। हताशा कहें या तनाव मगर लोगों में जीवन से मोह भंग हो रहा है और खुद ही जिंदगी की डोर को तोड़ रहे हैं। मौजूदा वक्त में आत्महत्या के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। आत्महत्या के आंकड़े तस्दीक करने के लिए काफी हैं। साल 2023 में 91 लोगों ने आत्महत्या की थी जबकि साल 2022 में यह आंकड़ा 79 था। इस साल अप्रैल के महीने में ही दस से ज्यादा लोगों ने खुद ही मौत को गले लगा लिया है।
पिछले साल की बात करें तो साल 2023 में 53 पुरुष और 38 महिलाओं ने आत्महत्या कर ली थी, यानि पुरुष खुदकुशी करने में भी आगे रहे। हालांकि पुरुषों को मानसिक रूप से मजबूत माना जाता है। फिर भी हताशा के चक्रव्यूह में पुरुष ज्यादा फंसते नजर आए।
- केस नंबर एक : किरतपुर के मोहल्ला भुड्डी के रहने वाले अजय (25) ने 24 अप्रैल को पंखे से फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। वही मंडावर क्षेत्र के रायपुर निवासी उर्वशी पत्नी विनीत घरेलू कलह के चलते 12 मार्च को जहरीला पदार्थ का सेवन कर खुदकुशी कर ली थी।
- केस नंबर दो : 29 फरवरी को मंडावर थाना क्षेत्र के गांव खानापुर माधो के रहने वाले जितेंद्र (20) पुत्र जयपाल ने फांसी लगा ली थी। जिसमें उसकी मौत हो गई। जितेंद्र कहीं बाहर रहकर नौकरी करता था, गांव आने के बाद उसने यह कदम उठाया।
- केस नंबर तीन : अफजलगढ़ के गांव नावका निवासी गजेंद्र पुत्र आनंद सिंह ने नौ अप्रैल को जहरीले पदार्थ का सेवन का आत्महत्या कर ली थी। दरअसल गजेंद्र सिंह पर बैंक का कर्ज था, जिसे वह अदा नहीं कर पाया और तकादा बढ़ने पर आत्महत्या कर ली थी।
- केस नंबर चार : छह अप्रैल को स्योहारा थाना क्षेत्र के गांव जागीर निवासी हेमराज सिंह (55) पुत्र दलीप सिंह ने खुद के ही खेत में पेड़ पर फांसी का फंदा लगा लिया और आत्महत्या कर ली थी।
- केस नंबर पांच : 24 अप्रैल को मंडावली के गांव फजलपुर मान उर्फ गदाईका निवासी सुभाष पुत्र मुरली (50) ने गृह क्लेश के चलते जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया। जिससे उसकी मौत हो गई। वहीं इसी दिन मंडावली निवासी मुनेंद्र ने अपनी पत्नी से विवाद के चलते रस्सी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।
- आत्महत्या करने के कारण
- सामाजिक तौर पर दूरी
- मानसिक बीमारी (तनाव, घबराहट, बीमारी के बारे में नहीं बताना, बाइपोलर डिसऑर्डर, डिस्टीमिया, नशे की आदत)
- आवेश में आने की प्रवृत्ति
- आपसी संबंध खराब होने पर
- आर्थिक समस्या
- ऐसे हो सकती है आत्महत्या की रोकथाम
- सामाजिक संबंध अच्छे होने चाहिए
- मानसिक बीमारी का इलाज कराएं
- मानसिक बीमारी के बारे में खुलकर बात करें
आत्महत्या करने से पहले आने वाले विचार
- अचानक से संपत्ति का प्लान करना
- विरासत की बात करना
- आत्महत्या के बारे में ज्यादा बात करना
- व्यवहार में बदलाव होना
- उम्मीद टूटना, जीवन में कुछ नहीं बचा जैसे विचार आना
- वर्जन::
मेडिकल अस्पताल में हर महीने करीब 1200 मरीज मानसिक बीमारी से ग्रसित आ रहे हैं। समय से इलाज शुरू होने पर मानसिक बीमारी दूर हो रही है। सामाजिक संबंध अच्छे रखे। जिससे काफी हद तक आत्महत्या से बचा जा सकता है। मानसिक बीमारी और खराब रिश्ते सबसे अधिक आत्महत्या का कारण हैं। - डॉ. नितिन कुमार, मनोरोग विशेषज्ञ, मेडिकल अस्पताल, बिजनौर
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यदि आपके मन में तनाव, मनोविज्ञान से संबंधित कोई उलझन हो तो हम से सवाल पूछेे। आपकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी। मनोचिकित्सक से बात करके इन सवालों के जवाब प्रकाशित भी किए जाएंगे।
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