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पैसों की चाहत में कलेजे के टुकड़ों को मां-बाप भेजते हैं मजदूरी करने

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बिजनौर/नहटौर। जिले में बिहार व झारखंड से काम करने आने वाले मजदूरों की आड़ में बच्चों को भी लाया जा रहा है। ठेकेदार के माध्यम से यह बच्चे घरों में डेढ़ से दो हजार रुपए प्रति माह की नौकरी पर नौकरी कर रहे हैं। इसका खुलासा नहटौर क्षेत्र में झारखंड के दो बच्चों को मुक्त कराने के दौरान हुआ है। दोनों बच्चों को उनके परिजनों के पास भेजने की तैयारी शुरू हो गई है। हालांकि बच्चों को केवल घरों में काम कराने के लिए लाया जा रहा है। जो ठेकेदार बच्चों को झारखंड, बिहार से ला रहे हैं, उसके अलावा घरों में काम कराने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी की जा रही है।
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जानकारी के अनुसार बिहार व झारखंड से बड़ी संख्या में लोग रोजी रोटी के लिए पंजाब व दिल्ली के साथ यूपी में भी आते हैं। ट्रेन के माध्यम से इन लोगों को खेप की तरह कई क्षेत्रों में भेजा जाता है। बिहार व झारखंड से ठेकेदार इनको लाता है। पहले जवान या बूढ़े लोग ही मजदूरी के लिए लाए जाते थे लेकिन अब छोटे-छोटे बच्चों को भी काम कराने के लिए लाया जाता है। इनको भी ठेकेदार घरों में लगा देते हैं। बिहार व झारखंड से ठेकेदार इनके परिवारों की सहमति से लाता है। इन्हें डेढ़ से दो हजार रुपये मेहनताने के रूप में दिए जाते हैं। मई, जून में यहां से अपने घरों को चले जाते हैं।
इन बच्चों की सभी जिम्मेदारी ठेकेदार की होती है। ठेकेदार बच्चों को घरों में लगाने के लिए एक मुश्त रकम वसूलता है। कई बार इनको लेकर विवाद भी हो जाता है। जब यह लोग ट्रेन से आते थे तो इनको उतार लिया जाता था। लॉकडाउन के बाद से ट्रेन नहीं चलने पर इनको निजी वाहनों से लाया जा रहा है। नहटौर के नंहेड़ा व मेहरलीपुर बाकरनगर से झारखंड के दो बालकों को मुक्त कराने के दौरान इसका खुलासा हुआ है। उनके साथ अन्य बच्चे भी आए थे, इनमें दो लड़कियां भी थीं, लेकिन उनका कुछ पता नहीं लग सका है।
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कोट
डीएम रमाकांत पांडेय ने बताया कि ये बच्चे घरों में काम करने के लिए झारखंड से लाए गए थे। फिलहाल उन्हें प्रेमधाम आश्रम में रखा गया है। दोनों बच्चों के परिजनों से बात हो गई है। परिजनों की रजामंदी से बच्चे भेजे गए थे। ठेकेदार इन बच्चों को लेकर आते हैं। जो ठेकेदार बच्चों को लेकर आ रहे हैं उनके व बच्चों से घरों में काम कराने वाले लोगों के खिलाफ बालश्रम कानून के अंतर्गत कार्रवाई होगी। पता चला है कि एक और बच्चा झारखंड से लाया गया है। उसका भी पता किया जा रहा है। सभी थानों को निर्देश दिए गए हैं कि घरों में काम करने वाले ऐसे बच्चों का पता किया जाए।
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बाल श्रम के लिए झारखंड से लाए गए थे छह बच्चे
दो बालिकाओं समेत अन्य चार का पता लगाने में जुटा प्रशासन
बिजनौर। झारखंड राज्य से लाए गए बच्चों के मामले में नया खुलासा हुआ है। बच्चों की संख्या दो बालिकाओं समेत छह थी। बच्चे बाल श्रम के लिए लाये गए थे। प्रशासन बाकी चार बच्चों का पता लगाने में जुटा है। डीएम रमाकांत पांडेय ने मामले की जांच करके विधिक कार्रवाई करने को कहा है।
प्रशासन ने थाना नहटोर क्षेत्र के नन्हेड़ा तथा मेहर अली से दो बच्चे बरामद किए थे। जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय कुमार के अनुसार बच्चे बालश्रम के लिए झारखंड राज्य से लाए गए थे। बच्चों के पास से आधार कार्ड मिले हैं। झारखंड राज्य के जिला लातेहार के अधिकारियों से बच्चों के निवास का सत्यापन हो गया है। बताया कि दोनों बच्चों के मेडिकल परीक्षण के बाद बाल कल्याण समिति को सौंप दिया गया है।
बच्चों को बरामद करने वाली टीम की प्रभारी रूबी गुप्ता ने बताया कि एक बच्चा नन्हेड़ा गांव के जिस व्यक्ति के पास मिला है उसने लाने वाले कथित ठेकेदार का नाम नहीं बताया है। जांच में यह बात सामने आई है कि गांव के प्रधान ने गांव में अनजान बच्चा होने की जानकारी फोन से पुलिस को दे दी थी। उन्होंने बताया कि दूसरा बच्चा मेहर अली गांव के लोगों को रोता हुआ मिला था। बच्चे ने बताया कि वे जिस बोलेरो गाड़ी से आए थे, उनमें छह बच्चे थे। इनमें दो बालिकाएं भी थी। बच्चे तीन चार दिन से भूखे थे। बच्चों से गोबर उठवाने तथा गन्ना छीलने का काम लिया जा रहा था।
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