सरकारी केंद्रों पर नहीं खरीदा जा रहा धान
धामपुर। किसानों को अपना धान बेचने के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकारी क्रय केंद्र के चक्कर लगाने के बाद भी किसानों के धान की खरीद नहीं हो पा रही है। किसानों को ओने-पौने दामों में बिचौलियों को धान बेचना पड़ रहा है। आरोप है वह पिछले कई दिन से धान क्रय केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है। केंद्र प्रभारी धान रखने की जगह न होने की बात कहकर किसानों को टरका रहे हैं।
अफजलगढ़ ब्लॉक में धान की सबसे ज्यादा पैदावार होती है। इसके बाद भी इस इलाके में तमाम क्रय केंद्रों को बंद कर दिया गया है। धान क्रय केंद्रों की पर्याप्त संख्या नहीं होने से ब्लॉक के किसान धान बेचने के लिए भटकते फिर रहे हैं। किसान सत्येंद्र सिंह, महिपाल सिंह, विजयपाल सिंह, राशिद अहमद का कहना है कि वह तीन दिन से धान बेचने के लिए आधा दर्जन क्रय केंद्रों के चक्कर लगा चुके हैं। केंद्र प्रभारी उन्हें टरका देते हैं। आरोप है कि अधिकारियों ने राइस मिल मालिकों की सांठगांठ के चलते अधिकतर केंद्र ऐसे स्थानों पर खोले गए हैं, जहां पर धान रखने की उचित व्यवस्था नहीं है। एक दो किसानों का धान की तोल होने से सेंटर पर धान रखने की जगह नहीं रहती। खरीद केंद्रों पर धान की खरीदारी नहीं होने पर किसानों को विवश होकर ओने-पौने दामों पर राइस मिल मालिकों या बिचौलियों को धन बेचना पड़ रहा है। बिचौलिए धान की 1200 व 1300 रुपये प्रति क्विंटल में खरीद कर रहे हैं। जबकि सरकार ने धान का समर्थन मूल्य 1868 से1888 रुपये क्विंटल रखा गया है। आरोप है कि अफजलगढ़ ब्लॉक में खरीदे जाने वाले सरकारी धान की इलाके के तीन चार राइस मिलों में चावल की कुटाई होती है। अधिकारियों को इससे मोटा कमीशन मिलता है। इसी मिलीभगत में किसान बुरी तरह से पिस जाता है।
मिल मालिकों से चावल की खरीद करती है सरकार
धान की दुर्दशा की मुख्य वजह यह बताई जा रही है कि इन मिल मालिकों से सरकार चावल की खरीद करती है। जितने कम धान की खरीद केंद्रों पर होगी, उतना अधिकारियों को मुनाफे का सौदा रहता है। मिल मालिक किसानों से 1500 रुपये क्विंटल में खरीद करते हैं। बाकी की रकम को अधिकारी और मिल मालिक बंदरबांट करते हैं। हर मिल मालिक किसान से तो सस्ते दाम पर धान खरीद लेता है। फिर उसी किसान के रजिट्रेशन पर सरकारी समर्थन मूल्य का पैसा ले लेता है। इस खेल को खेलने के लिए मिल मालिक किसानों के पहले ही रजिस्ट्रेशन करा लेते हैं। जब किसान मिल मालिकों से पूरी रकम मांगता है तो वह अधिकारियों की हिस्सेदारी का रोना रो देता है। जिला खाद्य विपणन अधिकारी घनश्याम वर्मा का कहना है कि कई धान के खरीद केंद्र बंद कर दिए हैं।