कर्मचारियों को संविदा पर रखने का विरोध
बिजनौर। शासन ने सरकारी नौकरियों में परिवर्तन करने का मन बना लिया है। पहले कर्मचारियों को पांच वर्ष संविदा पर काम करने के आदेश का विरोध शुरू हो गया है। पिछले कई वर्षों से संविदा पर चल रहे कर्मचारी कहते हैं कि पहले सरकार उन्हें पूर्णकालिक का दर्जा दे, उसके बाद आगे लोगों को संविदा पर रखा जाए।
अनुदेशक वेलफेयर एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष चौधरी संदीप सिंह बताते हैं कि जिले में जूनियर हाईस्कूलों में 400 अनुदेशक संविदा पर कार्य कर रहे हैं। वर्ष 2013 में अनुदेशकों की नियुक्ति की गई थी। उन्हें सात हजार रुपये मानदेय दिया जाता है। बाद में सरकार ने 17,000 रुपया देने का वादा किया था। उन्हें सात साल बीतने के बाद भी सात हजार रुपये मिल रहे हैं। सभी अनुदेश योग्य हैं, उन्हें पूर्णकालिक का दर्जा दिया जाना चाहिए। आदर्श शिक्षा मित्र शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष सुधीर कुमार चौहान ने बताया कि पिछले 20 वर्षों से शिक्षामित्र मानदेय पर है। उनकी सुध नहीं ली गई। दस हजार रुपय महीने के मानदेय पर परिषदीय प्राइमरी स्कूलों में शिक्षक का काम कर रहे हैं। उन्हें अभी तक पूर्ण शिक्षक होने का सभी को मौका नहीं मिला है। एसोसिएशन के महामंत्री मोहम्मद वाइस अब्बासी ने बताया भी सरकार के इस निर्णय का विरोध किया है।
अनुदेशक वेलफेयर एसोसिएशन की महामंत्री अनु विश्नोई ने बताया कि अनुदेशक विज्ञापन के माध्यम से सभी मानक पूरे किए थे, सरकार अभी भी अनुदेशकों की सुध नहीं ले रही। उन्हें मानदेय भी दिया जा रहा है। उन्होंने अनुदेशकों को भी शिक्षक का दर्जा दिलाने की मांग की है। संविदा पर काम कर रहे कर्मचारी अतुल सिंह का कहना है जिन विभागों में संविदा पर लोग कार्य कर रहे हैं, पहले उन्हें पूर्णकालिक का दर्जा दिया जाना चाहिए।
सुधीर कुमार चौहान।- फोटो : BIJNOR
मोहम्मद वाइस अब्बास।- फोटो : BIJNOR
चौधरी संदीप सिंह।- फोटो : BIJNOR