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फ्री कोचिंग सेंटर में नहीं बढ रही युवाओं की संख्या

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कोचिंग सेंटर में नहीं बढ़ रही युवाओं की संख्या
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बिजनौर। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए शासन की ओर से शुरू हुए फ्री कोचिंग सेंटर में प्रवेशार्थियों की संख्या नहीं बढ़ रही है। स्टाफ भी नहीं बढ़ा है। वर्धमान कॉलेज के छात्रों ने एनडीए आदि परीक्षाओं में प्रवेश के लिए रजिस्ट्रेशन खोलने की मांग उठाई है।
शासन ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने के लिए फ्री कोचिंग सेंटर खोले हैं। जिले में वर्धमान कॉलेज बिजनौर में केंद्र संचालित हैं। कोचिंग सेंटर का शुभारंभ 31 दिसंबर 2021 को हुआ था। कोचिंग सेंटर की देखरेख का जिम्मा समाज कल्याण विभाग को सौंपा गया है। कोचिंग सेंटर में प्रवेश के लिए शासन की वेबसाइट पर आनलाइन पंजीकरण हुआ था। इसके बाद शासन से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए 400 युवाओं की सूची जिले को मिली थी। कोचिंग सेंटर शुरू हुए एक सप्ताह हो गया है। पहले दिन करीब 150 अभ्यर्थी उपस्थित बताए गए थे। परंतु उसके बाद संख्या धीरे-धीरे कम हो गई है। जानकारी के अनुसार सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने के लिए 256 छात्रों की सूची मिली थी। परंतु युवाओं की उपस्थिति 60-70 से आगे नहीं बढ़ रही हैं। जूनियर इंजीनियर परीक्षा की तैयारी के लिए आई 19 युवाओं की सूची में से आठ दस आ रहे हैं।
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युवाओं ने बताया कि एनडीए, सीडीएस की क्लासेज शुरू ही नहीं हुई हैं। सूत्र बताते हैं कि जब इस बारे में समाज कल्याण विभाग से कहा गया तो उन्होंने एनडीए, सीडीएस की क्लासेज जूनियर इंजीनियर क्लासेज के साथ चलाने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया है। शासन के निर्देश हैं कि हर लेक्चरर की वीडियोग्राफी कराई जाए। वीडियो ऑनलाइन अपलोड की जाए। साथ ही ऑनलाइन यू ट्यूब चैनल बने। इसके लिए शासन से 10 लाख रुपये धनराशि का प्रावधान किया गया है।
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कोर्स कोआर्डिनेटर नहीं आए
शासन ने कोचिंग सेंटर को सुचारु एवं व्यवस्थित रूप से चलाने के लिए कोर्स कोआर्डिनेटर की व्यवस्था की है। कोर्स कोआर्डिनेटर की ड्यूटी लेक्चर उपलब्ध कराना तथा लेक्चरर की व्यवस्था करना है। कोर्स कोआर्डिनेटर प्रतिदिन रिपोर्ट प्रशासन व शासन को देते हैं। लेकिन कोर्स कोआर्डिनेटर केंद्र पर नहीं आए हैं। कोचिंग सेंटर शाम तीन बजे शुरू होता है। युवाओं की बात मानें तो अभी तक केवल दो कालांश ही पढ़ाई होती है। जिला समाज कल्याण अधिकारी आनंद कुमार सिंह का कहना है कि कोचिंग क्लासेस में संख्या बढ़ाने के प्रयास हो रहे हैं।
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