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स्कूलों में छात्रों की नहीं बढ़ रही संख्या

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बिजनौर। यूपी बोर्ड के स्कूल खुले एक माह से अधिक समय हो गया है। स्कूलों में छात्रों की संख्या नहीं बढ़ रही है। बोर्ड की प्रयोगात्मक परीक्षा कराने की तैयारी चल रही है लेकिन छात्रों के प्र्रैक्टिकल पूरे नहीं हुए हैं। ऐसे में कोरोना की दूसरी लहर की खबरों ने अभिभावकों की परेशानी बढ़ा दी है।
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जिले में यूपी बोर्ड के 387 विद्यालय हैं। इन स्कूलों के बोर्ड की परीक्षा के लिए हाईस्कूल के 50077 तथा इंटर के 40089 छात्र पंजीकृत हैं। हाईस्कूल की आंतरिक प्रयोगात्मक परीक्षा होती है जबकि इंटर की प्रैक्टिकल परीक्षा लेने बोर्ड से नियुक्त बाहरी परीक्षक आते हैं। बोर्ड ने प्रयोगात्मक परीक्षा कराने की तैयारी शुरू कर दी है।
कोरोना के कारण करीब सात माह बाद स्कूल अक्तूबर में खुले थे। शासन ने छात्रों को स्कूल भेजने के लिए अभिभावकों की सहमति जरूरी की थी। जिला विद्यालय निरीक्षक दफ्तर के अनुसार करीब एक लाख छात्रों में से मात्र 40 हजार अभिभावकों की अनुमति मिली थी। एक माह से अधिक समय बीतने पर भी स्कूल आने वाले छात्र की संख्या में खास बढ़ोतरी नहीं हुई है।
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स्कूलों से आ रही जानकारी के अनुसार छात्रों के प्रैक्टिकल नहीं हो रहे हैं। अभिभावक कोरोना के डर से छात्रों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं। ऑनलाइन पढ़ाई में प्रयोगात्मक कालांश की भी कोई व्यवस्था नहीं है। शासन ने कोरोना के कारण हाईस्कूल तथा इंटर का पाठ्यक्रम तीस प्रतिशत कम किया है। बताया जाता है कि प्रैक्टिकल में कोर्स कम होने की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
कोरोना की दूसरी लहर की खबरों ने अभिभावकों की परेशानी बढ़ा दी है। अब अभिभावक सहमति देने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। छात्रों के समक्ष प्रयोगात्मक परीक्षा को लेकर असमंजस की स्थिति है। डीआईओएस राजेश कुमार का कहना है कि बोर्ड से प्रयोगात्मक परीक्षा कराने के बारे में अभी कोई निर्देश नहीं है। स्कूलों को छात्रों के प्रैक्टिकल समय से पूरे कराने को कह दिया गया है।
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