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नींदडू़ में मृतकों की संख्या हुई 56

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नींदडू़ में मृतकों की संख्या 56 हुई
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बिजनौर, नींदडू़। नींदडू़ में बुखार व अन्य रोगों से मृतकों की संख्या 56 हो गई। यह आसपास के गांव में सबसे अधिक तादाद है। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग की कोई टीम अभी तक गांव में जांच करने नहीं पहुंची है। इतनी मौतों के बावजूद निगरानी समिति को गांव में एक भी बीमार व्यक्ति नहीं मिला।
ग्रामीण नींदडू़ में बड़ी तादाद में मृत्यु का कारण त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के समय दूसरे जनपद एवं दिल्ली, मुंबई, पंजाब व हरियाणा आदि में कार्य करने वाले मतदाताओं का वोट डालने के लिए अपने घर आना बता रहे हैं। कहा जा रहा है कि बाहर से आने वाले व्यक्तियों में कई लोग कोरोना संक्रमित हो सकते हैं। 19 से 25 अप्रैल तक करीब पांच मौत हुईं। जबकि 26 अप्रैल को नौ, 27 को छह, 28 को तीन, 29 को चार व 30 को छह लोगों की मृत्यु हुई। एक मई को दो, दो को चार, तीन को तीन, चार व छह को एक एक, सात व आठ को तीन-तीन मौत र्हुइं। इस तरह 21 दिनों में 56 लोगों की मौत हो चुकी हैं। इनमें अधिकांश की मौत बुखार, वायरल, टायफाइड, दमा, क्षय व शुगर शारीरिक कमजोरी एवं कोरोना के भय के चलते हृदयगति रुकने से हुईं। अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. पीके गुप्ता ने बताया कि मामला गंभीर है। जल्द गांव में टीम भेजी जाएगी और सर्वे कराया जाएगा। वहीं, दूसरी ओर पीएचसी धामपुर के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनीष राज शर्मा ने बताया कि नींदडू़ में ज्यादा मौतों का कारण ग्रामीणों द्वारा कोविड से बचाव के टीके नहीं लगवाना है। यदि लोगों ने टीके लगवाए होते, तो इतनी मौतें नहीं होतीं।
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पांच दिन में हो गया 1543 परिवारों का सर्वे
आठ मई को नींदडू़ खास की बैठक में आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, चौकीदार, युवक मंगल दल अध्यक्ष व रोजगार सेवक आदि पर आधारित निगरानी समिति की आठ टीमें बनाई गई थीं। टीमों को घर घर जाकर सर्वे के अलावा बीमार व्यक्ति का ब्योरा तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। निगरानी समिति को रोजाना 50 घरों को चेक करना था। टीमों को जांच के लिए आवश्यक उपकरण पल्स ऑक्सीमीटर और थर्मल स्केनर उपलब्ध कराना तो दूर, उन्हें सुरक्षा की दृष्टि से जरूरी पीपीईग किट, ग्लब्ज, मास्क एवं सैनिटाइजर तक नहीं मिले। 1543 परिवारों का सर्वे पांच दिन में पूरा कर लिया गया। ग्राम पंचायत अधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि निगरानी समिति द्वारा पांच दिनों में सर्वे पूरा कर जो रिपोर्ट दी गई है, उसमें कोई व्यक्ति रोगी नहीं दर्शाया गया है। इतनी मौतों वाले गांव में किसी मरीज का न मिलना आश्चर्यचकित करने वाला है।
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अभी तक नहीं आई टीम: ग्राम प्रधान
ग्राम प्रधान अदीबा एवं उनके पति मोहम्मद राहत का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई टीम गांव में जांच करने नहीं आई। विधिवत जांच होगी, तो काफी मरीज निकलेंगे। प्रधानों की शपथ नहीं होने के कारण अभी उन्हें वित्तीय अधिकार प्राप्त नहीं हैं। इसके बावजूद वह एक सप्ताह से अपने पास से गांव को लगातार सैनिटाइज करा रहे हैं।
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