अब जिले बिजनौर में ही होगी आरटीपीसीआर जांच
बिजनौर। जनपदवासियों के लिए एक अच्छी खबर है। अब कोरोना संक्रमण की पुष्टि कराने के लिए किसी को भी लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज मेरठ से रिपोर्ट आने का इंतजार नहीं करना होगा। एक सप्ताह के भीतर जिला बिजनौर में ही यह सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। यहां पर टेस्टिंग लैब स्थापित करने के लिए जगह का भी चयन कर लिया गया है। अफसरों की मानें तो सुबह को लिए गए आरटीपीसीआर सैंपल की जांच रिपोर्ट की शाम तक पुष्टि हो जाया करेगी। अभी यह जांच रिपोर्ट आने में तीन से चार दिन का समय लगता है।
पूरी दुनिया इस वक्त कोरोना महामारी से जूझ रही है। इस वजह से रैपिड एंटीबॉडीज टेस्ट, आरटी-पीसीआर टेस्ट, हॉटस्पॉट्स और कंटेनमेंट जोन जैसे शब्द भी आजकल चर्चाओं में हैं। कोरोना महामारी से हर कोई किसी न किसी प्रकार से प्रभावित है, जिसे देखो वही इससे बचने के उपाय ढूंढ रहा है। जनपद में फिलहाल तीन प्रकार से कोरोना की जांच की जा रही है। इनमें आरटीपीसीआर टेस्ट, रेपिड एंटीजन किट से और ट्रूनॉट मशीन से कोरोना संबंधी जांच की जाती है। रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलिमरेज चेन रिएक्शन (आरटीपीसीआर) टेस्ट, यह एक ऐसी लैब तकनीक है, जिसमें आरएनए के डीएनए में रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन को जोड़ते हुए वायरस का पता लगाता है।
सीएमओ डॉ. विजय कुमार यादव ने बताया कि आरटीपीसीआर में इस बात की जांच की जाती है कि वायरस मौजूद है या नहीं। इसके लिए व्यक्ति के रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट, थ्रॉट स्वैब या नाक के पीछे वाले गले के हिस्से से सैंपल लिया जाता है। इसके नतीजे आने में 12 से 24 घंटे का वक्त लगता है। सरकारी लैब में यह टेस्ट मुफ्त में होता है, जबकि निजी स्तर की लैब में इस टेस्ट की कीमत 700 रुपये है। प्राइवेट लैब आरटीपीसीआर टेस्ट का इस्तेमाल करते हैं।
जगह का कर लिया गया है चयन
सीएमओ के अनुसार आरटीपीसीआर जांच करने के लिए लैब स्थापित करने के लिए जगह का चयन कर लिया गया है। यह लैब जिला महिला अस्पताल के पुराने भवन में स्थापित की जाएगी। इसके लिए मुख्यालय से लैब के उपकरण आदि सामान आ चुका है। लखनऊ से आए इंजीनियर सर्वे कर गए हैं और उन्होंने इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। अब केवल वहां से हरी झंडी मिलने का इंतजार है। उन्होंने बताया कि यदि सब कुछ ठीक ठाक रहा तो एक सप्ताह के भीतर यह लैब जनपद बिजनौर में ही शुरू हो जाएगी।