बिजनौर। जिले में आग लगने जैसी आपदाओं से निपटने के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। जनपद में यदि कहीं भी बहुमंजिली इमारतों में आग लगती है तो उसे बुझाने का इंतजाम खुद ही करना होगा। साथ ही स्कूल, कॉलेजों समेत अन्य संस्थाओं में फायर स्टॉप का इंतजाम नहीं हैं। ये सभी पूरी तरह से फायर ब्रिगेड पर निर्भर हैं। कहने को तो विभिन्न प्रकार की आपदाओं के नियंत्रण के लिए कलक्ट्रेट में भवन बनवाया गया है, लेकिन यह देखरेख के अभाव में प्रयोगहीन है। भयंकर अग्निकांड पर काबू पाने के लिए दमकल विभाग के पास पर्याप्त साधन नहीं हैं।
वर्तमान में जिले की आबादी करीब 42 लाख है। इसके बावजूद दमकल विभाग के पास उपलब्ध साधन नाकाफी हैं। अफसरों के अनुसार जिले में दमकल विभाग के पास 35 फायर टैंकर हैं, जबकि 50 जूसर टैंकरों की व्यवस्था है। इसके अलावा 35 फीट की पांच सीढ़ियां हैं और नौ फोर्टेबल पंपों की व्यवस्था है। फिलहाल जिले में आपदा नियंत्रण के लिए संसाधनों को बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। एफएसओ संतोष कुमार राय के अनुसार बहुमंजिला इमारत स्वामी को अग्निकांड पर काबू पाने के लिए स्वयं ही इंतजाम करना होता है। दमकल विभाग अन्य स्थानों पर लगी आग को बुझाने का काम करता है। उन्होंने बताया कि जिले में फिलहाल एक ही बहुमंजिला इमारत है। इसके अलावा सभी सामान्य भवन बने हैं।
आधे अधूरे लगे संयंत्र
बिजनौर में केवल एक ही बहुमंजिला इमारत एसआरएस मॉल है। इसमें भी आग बुझाने के पर्याप्त साधन नही है। कलक्ट्रेट में नए भवन बने है। मगर, इनमें भी आधे अधूरे आग बुझाने के संयंत्र लगे है। इन्हें भी कोई नहीं देख रहा है।