शोर तो अच्छे दिनों का था गए मौसम में...
नजीबाबाद। गीत गजल संगम एकेडमी की ओर से आपसी सौहार्द और देशप्रेम पर कलाम पेश करके शायरों ने खूब वाहवाही लूटी। अनवर बिजनौरी, शनावर किरतपुरी, डॉक्टर अतीक दानिश और खुर्शीद को फख्र ए बिजनौर अवार्ड से सम्मानित किया गया।
नगर के मोहल्ला मुगलूशाह में गीत गजल संगम एकेडमी की ओर से महेंद्र अश्क की अध्यक्षता में मुशायरा आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि अनवर बिजनौरी, शनावर किरतीपुरी व डॉक्टर अतीक दानिश की मौजूदगी में कारी शुएब नफीस और अख्तर मुल्तानी की नात-ए-पाक से मुशायरे का आगाज हुआ। शायर महेंद्र अश्क ने पढ़ा - शोर तो अच्छे दिनों का था गए मौसम में, दूर तक फैल गई जर्द तबाही कैसे। शनावर किरतपुरी ने पढ़ा- इसको कहते हैं मोहब्बत के तेरे हुक्म पर हम, जैसे होते है उसी हाल में आ जाते है। डॉक्टर अतीक दानिश ने पढ़ा - मुसलसल क्यूं दिखावे की इबादत, अगर दिल से हो तो एक सजदा बहुत है। खुर्शीद अहमद ने पढ़ा - डुबोकर मुझको गम की गहराइयों में, मुझे तेरी याद आती है तन्हाईयों में। डॉक्टर आफताब नोमानी ने पढ़ा- उसका अंदाजे इबादत भी है लोगों से जुदा, वो इबादत भी सियासत की तरह करता है। मोहम्मद ताबिश ने पढ़ा- गले लगना सभी हिंदू-मुसलमां चाहते हैं पर, कदम जब भी बढ़ाते है सियासत रोक लेती है। कारी शुएब ने पढ़ा- मेरे ही हक में मिले दोस्तों सारे सबूत, फिर भी मुंसिफ ने दिया है फैसला मेरे खिलाफ। अनवर बिजनौरी ने पढ़ा- चांद और सूरज भी तकते हैं, बारी-बारी तेरी सूरत। साजिद सागर ने पढ़ा - खुदकशी भी नहीं करनी है हमें, उसको मर के भी दिखाना है मियां। शुएब नफीस के संचालन में आयोजित मुशायरे में डॉक्टर इलियास अंसारी, इम्तियाज अजहर, नौशाद, नदीम आसिफ, मुकीम अहमद, सैय्यद अहमद, जुबैर मुल्तानी ने भी कलाम पेश किए। इस दौरान शादाब नोमानी, सुहेल, आमिर, रशीद अहमद, मोहम्मद गाजी, गुड्डू और आसिफ मुल्तानी आदि मौजूद रहे।