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...नहीं है तो बस एक राहत नहीं है

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शेरकोट। मोहल्ला काजियान स्थित शायर तय्यब आजाद के आवास पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए शायरों की नशिस्त आयोजित की गई। शायरों ने जहां देश प्रेम से ओतप्रोत रचनाओं के माध्यम से देशभक्ति की भावना को जागृत करने का काम किया, वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के प्रसिद्ध शायर दिवंगत राहत इंदौरी को खिराजे अकीदत पेश करते हुए उनकी मगफिरत के लिए दुआ की गई।
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कार्यक्रम का आगाज हाफिज तौहीद अहमद ने तिलावत-ए-कुरआन व नात-ए-पाक के साथ किया। इस दौरान शायर तय्यब आजाद ने कहा ख्वाहिश ए तर्क ए मुहब्बत ही नहीं कर सकता, तुझ से रूठूं यह जसारत ही नहीं कर सकता। शायर मोहम्मद अशरफ शेरकोटी ने राहत इंदौरी को याद करते हुए कहा कि ये माना कि दुनिया में सब कुछ है अशरफ, नहीं है तो बस एक राहत नहीं है। अफजल शेरकोटी ने कहा ‘रह गई दब के किताबों में शनासाई मेरी, कौन जाने मुझे दीवान लिए फिरता हूं। शायर शफक्कत भारती ने राहत इंदौरी को खिराजे अकीदत पेश करते हुए कहा कि ‘बेखौफ हो के रूबरू सच बोलना तेरा, राहत सुकून देता था हक बोलना तेरा। मोहम्मद फुरकान ने फरमाया ‘हमारे एहद की खुशबू कहां से लाओगे, गुलाब यूं तो खिलेंगे हमारे बाद बहुत। फारसी व उर्दू जबान के विद्वान मुहम्मद फुरकान खलिश की सदारत व शायर शफकत भारती की निजामत में आयोजित हुए शेरी नशिस्त कार्यक्रम में चुनिंदा लोग शामिल रहे।
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