एंटी रैबीज इंजेक्शन को भूला स्वास्थ्य विभाग
बिजनौर। स्वास्थ्य विभाग एंटी रैबीज इंजेक्शन को भूल गया है। एक माह से जिला अस्पताल सहित सरकारी अस्पतालों में कुत्ते के काटे का इंजेक्शन नहीं है। जिससे कुत्तेे, बंदर, गीदड़ आदि जानवरों के काटे के मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल के अलावा जनपद में 11 प्राथमिक और 11 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं। इसके अतिरिक्त सैकड़ों की संख्या में उप प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी स्थित हैं। पिछले एक महीने से जिले के सरकारी अस्पताल एंटी रैबीज वैक्सीन से विहीन चल रहे हैं। जनपद में बंदरों का उत्पात किसी से छिपा नहीं है। हर रोज दर्जनों लोग बंदर और कुत्तों के काटने के बाद जिला अस्पताल इंजेक्शन लगवाने पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें यह कहकर लौटा दिया जाता है कि इंजेक्शन उपलब्ध नहीं हैं। सदर बाजार निवासी राकेश कुमार ने बताया कि उनके बेटे को बंदर ने काट लिया और वे जिला अस्पताल वैक्सीन लगवाने आए तो पता चला कि एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. ज्ञानचंद ने बताया कि एंटी रैबीज वैक्सीन लखनऊ मुख्यालय से ही कारपोरेशन की ओर से उपलब्ध कराई जाती है। इसके लिए कई बार डिमांड भेजी जा चुकी है, लेकिन अभी तक वैक्सीन नहीं मिल पाई, जिससे मरीजों को परेशानी हो रही है।
350 की एक, 2100 रुपये में लगती हैं छह डोज
खन्ना मेडिकल स्टोर के स्वामी शरद खन्ना ने बताया कि एंटी रैबीज इंजेक्शन का कोर्स लगवाने के लिए लगभग 2100 रुपये का पूरा कोर्स है। पूरा कोर्स छह इंजेक्शन का होता है। पहला टीका कुत्ते के काटने वाले दिन, दूसरा सातवें दिन, तीसरा 14 दिन पर, चौथा 28 वें दिन, पांचवां 30 और छठा तीन माह पर लगता है। छठी डोज वैकल्पिक होती है। यह टीका लगवाने पर व्यक्ति पूरे एक साल तक रैबीज के खतरे से मुक्त हो जाता है। यदि एक साल के भीतर उसे दोबारा से कुत्ता, बंदर, लंगूर, गीदड़ आदि काट ले तो फिर उसे एआरवी लगवाने की आवश्यकता नहीं होती है।