एनएचएम घोटाला : जांच के लिए गठित की टीम
बिजनौर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) में करीब सवा दो करोड़ रुपये के घोटाले की बात सामने आने पर डीएम के निर्देश पर सीएमओ ने जांच टीम गठित की है। टीम में एसीएमओ और अकाउंटेंट आदि शामिल रहेंगे। यह घोटाला एनएचएम के मिशन निदेशक स्तर से पकड़ा गया है। फर्जी जीएसटी वाले बिलों पर आठ फर्मों को ऑडिटर की टिप्पणी के बावजूद सीएमओ कार्यालय, सभी पीएचसी और सीएचसी स्तर से दो करोड़ 24 लाख 40 हजार 520 रुपये का भुगतान कर दिया गया। मिशन निदेशक ने डीएम से इस मामले की जांच कराकर एक सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट मांगी है।
घोटालों के लिए बदनाम हो चुके स्वास्थ्य महकमे में फिर से घोटाले का जिन्न बोतल से बाहर निकला है। अब हाल ही में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के मिशन निदेशक विजय विश्वास पंत के स्तर से जिले के स्वास्थ्य महकमे में सवा दो करोड़ का घोटाला फिर से पकड़ा गया है। मिशन निदेशक ने इस मामले में जिलाधिकारी रमाकांत पांडेय को पत्र भेजकर मामले की जांच कराने के निर्देश दिए हैं और एक सप्ताह के भीतर इसका जवाब मांगा है। ऑडिटर ने मिशन निदेशक को अवगत कराया था कि बिना टेंडर/कोटेशन के गलत जीएसटी नंबर के बिलों का आठ फर्मों को अवैध रूप से भुगतान कर दिया गया है। सीएमओ कार्यालय समेत सीएचसी और पीएचसी पर ऑडिट के लिए निर्धारित धनराशि से अधिक प्रति ब्लॉक दो हजार के बजाए पांच हजार रुपये की दर से भुगतान किया गया।
मामला पकड़ा जाने के बाद भी किया भुगतान
मिशन निदेशक के अनुसार वित्तीय वर्ष 2018-19 में फर्जी बिलों का भुगतान किए जाने की ऑडिटर की टिप्पणी के बावजूद सीएमओ कार्यालय, समस्त सीएचसी और पीएचसी जनपद बिजनौर द्वारा वित्तीय वर्ष 2019-20 में भी इन फर्मोें को भुगतान किया गया। इस अवधि में अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रोहताश कुमार एनएचएम के नोडल अधिकारी थे। फरवरी माह में ही शाहजहांपुर जनपद के लिए उनका ट्रांसफर हो चुका है। वर्तमान में एनएचएम के नोडल अफसर अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार गुप्ता हैं। इससे जाहिर होता है जिले के स्वास्थ्य अफसरों की भी इस गबन में संलिप्तता है। डॉ. रोहताश कुमार ने बताया कि इस मामले से उनका कोई लेना देना नहीं है। यह पीएचसी और सीएचसी स्तर का मामला है। सीएचसी और पीएचसी पर कुछ करने से पहले गाइड लाइन जारी की जाती है। यदि फिर भी गलत तरीके से भुगतान हुआ है तो संबंधित एमओआईसी और चिकित्साधीक्षक ही इसके जिम्मेदार हैं। सीएमओ विजय कुमार यादव ने बताया कि इस मामले की जांच के लिए डीएम के निर्देश पर जांच टीम का गठन किया गया है। टीम में एसीएमओ और अकाउंटेंट आदि शामिल रहेंगे। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। उन्होंने बताया कि जो भी दोषी होगा संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
चार साल पहले भी हुआ था घोटाला
जिले का स्वास्थ्य विभाग घोटालों के लिए चर्चाओं में रहता है। वर्ष 2016 में भी इस विभाग में तीन करोड़ दस लाख 95 हजार 769 रुपये का घोटाला हुआ था। इस मामले में एसीएमओ आरसीएच की ओर से 24 सितंबर 2016 को रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। थाना कोतवाली शहर पुलिस ने एनएचएम के लिपिक कैलाश और डीपीएम कार्यालय के लेखा प्रबंधक पंकज कुमार सिंह को दोषी मानते हुए जेल भेज दिया था, जो अब जमानत पर जेल से छूट चुके हैं।