नजीबाबाद। शिक्षाविद एवं पूर्व प्राचार्य डॉ. एलएस बिष्ट ने नई शिक्षा नीति पर चर्चा करते हुए शिक्षा के स्वरूप को रोजगारपरक बताया। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति स्वरोजगार की दृष्टि से दूरगामी परिणाम देगी।
साहू जैन कालेज के पूर्व प्रचार्य डॉ.एलएस बिष्ट ने सरस्वती विद्या मंदिर में आयोजित संगोष्ठी में उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए राष्ट्र स्तरीय टेस्टिंग एजेंसी द्वारा कॉमन एंट्रेेंस टेस्ट और पाठ्यक्रर्मों की चर्चा की। शिक्षाविद ने बताया कि नई शिक्षा नीति में उच्च शिक्षा मूूल रूप से तीन से चार साल पैटर्न पर आयोजित होगी। प्रथम वर्ष की पढ़ाई का एक वर्ष का सर्टिफिकेट कोर्स होगा। दूसरे वर्ष डिप्लोमा कोर्स, तीसरे वर्ष पढ़ाई पूर्ण होने पर डिग्री प्रदान की जाएगी। उन्होंने बताया कि चौथे वर्ष में किसी विषय या उद्देश्य की पूर्ति के लिए विशेष अध्ययन की व्यवस्था रहेगी। उन्होंने बताया कि इस शिक्षा व्यवस्था में प्रत्येक वर्ष छात्र कालेज छोड़ सकता है और मल्टी एंट्री और एग्जिट के तहत फिर से प्रवेश ले सकता है।
डॉ.एलएस बिष्ट ने नई शिक्षा नीति से व्यवसायिक शिक्षा को प्रभावी बनाने के सरकार के उद्देश्य की चर्चा करते हुए कहा कि व्यवसायिक शिक्षा के अंतर्गत विद्यार्थी कक्षा छह से अपनी रुचि और योग्यता के अनुसार व्यावसायिक विषय का चयन कर सकेंगे, जिससे किशोर अवस्था से ही विद्यार्थी स्वरोजगार की दिशा में अपनी सोच विकसित कर सकेगा। आत्मनिर्भरता और बेरोजगारी पर व्यावसायिक शिक्षा काफी हद तक अंकुश रख सकेगी।