लापरवाही बना रही निमोनिया का शिकार
बिजनौर। कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता और सर्दी से बचाव में लापरवाही बच्चों के साथ-साथ बड़ों को भी निमोनिया का शिकार बना रही है। ध्यान न देने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। निमोनिया से बचाव के लिए सावधानी बहुत जरूरी है।
सर्दी में बच्चों के निमोनिया की चपेट में आना आम बात है। लेकिन अब बड़े भी इसका शिकार हो रहे हैं। निमोनिया एक तरह से कोरोना का ही हलका स्वरूप है। यह मरीज के फेफड़ों पर असर डालता है। निमोनिया की कोई जांच नहीं होती है और लक्षणों के आधार पर ही इसका उपचार किया जाता है। समझा जाता है कि निमोनिया सर्दी से बचाव में लापरवाही से होता है, लेकिन ये जरूरी नहीं है। शरीर की कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता भी लोगों को निमोनिया का शिकार बना रही है। निमोनिया से बचाव के लिए शरीर को मजबूत करना भी जरूरी हो गया है।
ये हैं लक्षण
- बुखार और खांसी।
- सांस लेने में परेशानी होना।
- शरीर में हरारत रहना।
- पेट खराब रहना और दस्त आना।
ऐसे करें निमोनिया से बचाव
- सर्दी से बचाव को गरम कपड़े पहनें।
- बड़े और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें।
- मौसमी फल और सब्जी खाना।
- दलिया, बादाम आदि का सेवन करना।
- व्यस्क व्यायाम करें और पैदल घूमें।
शरीर को बनाएं मजबूत
संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. अली शाकिर के अनुसार निमोनिया लापरवाही और शरीर की कमजोरी की वजह से होता है। निमोनिया से बचाव के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना चाहिए। सर्दियों में बच्चों व बूढ़ों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।