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कोरोना सैंपल लेने में भी बरती जा रही लापरवाही

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अनुज कुमार शर्मा
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बिजनौर। जिले में कोरोना के बढ़ रहे मामलों के बीच सैंपल लेने में लापरवाही बरती जा रही है। जिले भर से अप्रैल माह में ही 136 नमूने फेल हो गए। मेरठ मेडिकल कॉलेज की प्रयोगशाला के सूत्रों के अनुसार ये नमूने सही ढंग से नहीं लिये गए थे। इस कारण लैब ने सभी 136 सैंपल दोबारा से मंगवाए हैं।
इस बार कोरोना संक्रमण के फैलाव की गति काफी तेज है। संभावित व्यक्ति की कोरोना जांच की जाती है। वर्तमान में तीन प्रकार से लोगों की जांच हो रही है। इनमें रेपिड एंटीजन किट से, आरटीपीसीआर, ट्रूनॉट मशीन से जांच हो रही है। एंटीजन किट से मात्र 15 मिनट में ही परिणाम का पता चल जाता है, जबकि ट्रूनॉट की जांच का 12 घंटे में पता चलता है और आरटीपीसीआर की जांच रिपोर्ट 24 से 72 घंटे के भीतर आती है। सही मायने में आरटीपीसीआर ही कंफर्म रिपोर्ट मानी जाती है।
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विभागीय सूत्रों के अनुसार आजकल सैंपल लेने में काफी जल्दबाजी की जा रही है, जिससे कोरोना संक्रमण के स्ट्रेन के स्वरूप का पता नहीं चल पा रहा है। अप्रैल माह में अब तक लगभग 136 सैंपल के स्ट्रेन क्लियर नहीं हो पाए हैं। इस कारण मेरठ मेडिकल कॉलेज की लैब ने इन्हें दोबारा से मंगवाया है।
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कोरोना के नोडल अधिकारी डा. पीआर नायर ने बताया कि कुछ सैंपल में स्ट्रेन क्लियर नहीं हो पाता। इससे संबंधित व्यक्ति का पता नहीं चल पाता कि वह कोरोना पॉजिटिव है अथवा नेगेटिव। इसलिए ऐसे लोगों को चिह्नित कर दोबारा से जांच की जाती है, जिससे वर्तमान स्थिति का पता चल सके। कभी-कभी ऐसा हो जाता है, यह जानबूझकर की गई गलती नहीं होती। उन्होंने बताया कि कोरोना जांच में लगे सभी लैब टैक्नीशियन को इस बारे में अलर्ट कर दिया गया है कि सैंपलिंग में कोई दिक्कत न हो। (संवाद)
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