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Bijnor News: जिस जमीन पर रेत था, उस पर चढ़ गए नाम, फंस गया मुआवजा

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संवाद न्यूज एजेंसी
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बिजनौर। मेरठ-पौड़ी फोरलेन के लिए जमीन अधिग्रहण के बाद मुआवजा बांटने की प्रक्रिया शुरू हुई तो राजस्व अभिलेखों ने ऐसा राज खोल दिया, जिसने 101 भूमिधर किसानों का मुआवजा ही फंस गया।
बिजनौर बैराज मार्ग पर नवलपुर की 9.695 हेक्टेयर, खेड़की-हेमराज की 6.120 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण हुआ था। दोनों गांव के 101 लोगों को 21.5 करोड़ रुपये मुआवजा मिलना था, जो अब एसएलओ विभाग ने राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग को वापस कर दिया है। एसएलओ वंदना कुशवाह ने बताया कि बिजनौर-बैराज मार्ग पर भी मेरठ-पौड़ी फोरलेन के लिए जमीन का अधिग्रहण हुआ था। इसमें नवलपुर और खेड़की हेमराज गांव की लगभग 15 हेक्टेयर जमीन गई थी। इनमें नवलपुर के सात किसान और खेड़की के 94 किसान चिह्नित किए गए।
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इन्हें अधिग्रहण की गई जमीन का 21.5 करोड़ मुआवजा दिया जाना तय हुआ। इससे पहले जब जमीन की जांच 1359 फसली डाटा से कराई गई तो इनकी जमीन रेत रेगिस्तान की मिली।
छह माह तक सर्वे विभाग में इसकी सुनवाई भी हुई, लेकिन यह जमीन रेत रेगिस्तान की ही रही। ऐसे में इस जमीन को सरकारी मान लिया गया और एनएचआई को 21.5 करोड़ रुपया वापस कर दिया गया।
n मुआवजे के लिए भी प्रॉपर्टी डीलरों ने खरीदी थी जमीन : बताया जा रहा है कि हाईवे के चौड़ीकरण की रूपरेखा पहले ही तैयार कर ली गई थी। ऐसे में अधिग्रहण और मुआवजे के लालच में प्रॉपर्टी डीलरों ने किसानों से उक्त जमीनों को खरीद लिया था। हालांकि अभी जमीन के कुछ हिस्सों में किसान भी काबिज हैं।
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उधर, हाईवे किनारे होने की वजह से भी इस जमीन पर लोगों की निगाहें पहले से ही लगी हुई थी। जमीन रेत रेगिस्तान की निकलने पर पूरा खेल बिगड़ गया। (संवाद)
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