शोपीस बने मल्चर, खेतों में पडे़ फसल अवशेष
बिजनौर। किसानों को खेतों में फसलों के अवशेष गलाकर खाद बनाने के लिए दिए गए मल्चर गन्ना समितियों में शोपीस बने खड़े हैं। जिले में अब तक 70 हजार हेक्टेयर से अधिक गन्ने के खेत खाली हो चुके हैं, लेकिन मल्चर से केवल 77 हेक्टेयर जमीन ही जोती गई है। मल्चर के फायदे शायद अभी आम आदमी तक नहीं पहुंच पाए हैं।
किसान अक्सर फसल अवशेष खेतों में ही जला देते हैं। पराली तो जिले में नहीं जलाई जाती है लेकिन खेतों में पत्ती को किसान जला देते हैं। इस साल जिले में फसल अवशेष जलाने के 29 मामले सामने आ चुुके हैं। जिनमें 75 हजार रुपये का जुर्माना भी वसूला जा चुका है। किसानों के फसल अवशेष जलाने पर जुर्माना लगाने से किसान संगठनों में भी रोष है। खेतों में फसल अवशेष को जोतकर खाद बनाने के लिए गन्ना विभाग में मल्चर भेजे गए हैं। जिले की सभी दस समितियों में मल्चर भेजे गए हैं। ये किसानों को किराये पर दिए जा रहे हैं। इनका किराया 25 रुपये प्रति घंटा निर्धारित किया गया है।
जिले में अब तक एक अनुमान के अनुसार 70 हजार हेक्टेयर से अधिक गन्ना खेतों से काटा जा चुका है। जाहिर है कि इन खेतों में दूसरी फसल बोई गई हैं। खेत तो जोते गए, लेकिन इनमे गन्ना समितियों से मल्चर नाम मात्र के लिए किराए पर लिया गया। जिले में दस मल्चर से केवल 77 हेक्टेयर जमीन ही मल्चर से जोती गई है। अधिकांश समितियों में मल्चर शटर के अंदर बंद पड़े हैं। इन्हें प्रदर्शन के लिए किसानों के सामने तक नहीं रखा जा रहा है।
समिति क्षेत्रफल किराया
अफजलगढ़ 26.705 4086
बिजनौर 15.977 3600
चांदपुर 9.158 984
धामपुर 2.960 650
हल्दौर 2.401 716
नगीना 2.215 646
नजीबाबाद 4.570 671
नूरपुर 1.400 275
स्योहारा 5.960 1457
नजीबाबाद मिल 6.300 257
योग 77.646 13342
नोट : आंकड़े गन्ना विभाग से लिए गए हैं।
फसल अवशेष से खेतों में जान
फसल अवशेष भूमि की उर्वरा शक्ति की जान होते हैं। इनसे फसल को नाइट्रोजन, पोटाश आदि मिलता है। अगर फसल में ये दोनों तत्व न हों तो किसान कितना ही रासायनिक खाद डाल ले उसका ज्यादा समय तक के लिए फायदा नहीं होता है। मल्चर से खेत को जोतने के लिए 50 हॉर्स पावर तक के ट्रैक्टर की जरूरत होती है। किसानों के पास आमतौर पर इतने बड़े ट्रैक्टर नहीं होते हैं। किसान किराए पर रूटावेटर से ही फसल जुतवाते हैं। जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह के अनुसार कृषि विभाग द्वारा सब्सिडी पर मल्चर दिए गए हैं। इनसे भी किसान खेत जुतवा रहे हैं। किसानों को मल्चर से जमीन जोतने के लिए काफी प्रेरित किया जा रहा है।