किसी दल के नेता से द्वेष नहीं रखते थे मुखर्जी : नसीब
बिजनौर। भारत रत्न व देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को पहली ही मुलाकात में देश के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने देश का भविष्य बताया था। प्रणव मुखर्जी ने उनकी इस बात को साबित करके दिखाया। देश के सबसे बडे़ पद को सुशोभित करने के साथ साथ देश का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भी उन्होंने अपने नाम किया। वे किसी भी दल के नेता से द्वेष नहीं रखते थे।
कांग्रेस एमएलसी नसीब पठान राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के करीबी रहे हैं। वे बताते हैं कि उनकी प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बेटे हरिकिशन शास्त्री से मित्रता थी। उनके साथ ही प्रणव मुखर्जी से उनका परिचय हुआ। प्रणव मुखर्जी शुरूआत से अंत तक कांग्रेसी विचारधारा से जुड़े रहे। नसीब पठान बताते हैं कि जब प्रणव मुखर्जी लाल बहादुर शास्त्री जी से मिले थे उस समय वे केवल छात्र थे। उन्होंने प्रणव मुखर्जी की राजनीतिक सोच से प्रभावित होकर उनसे लंबी बात की थी। बाद में उनसे कहा था कि वे देश का भविष्य हैं। राष्ट्रपति चुनाव में नसीब पठान यूपी से उनके चुनाव एजेंट थे। उन्होंने राष्ट्रपति को पूरे जी जान से चुनाव लड़वाया।
नसीब पठान बताते हैं कि प्रणव मुखर्जी कभी भी किसी भी दल के नेता से राजनीतिक द्वेष नहीं रखते थे। वे हमेशा सभी से गर्मजोशी से मिलते थे। उनके इस गुण के कारण ही विपक्षी भी उनका बेहद सम्मान करते थे। उनका यूपी से जुड़ा सभी काम वे उनसे ही बताते थे। उन्होंने अपनी मेहनत से कांग्रेस में बड़ा मुकाम हासिल किया। वे बताते हैं कि नागपुर में आरएसएस के कार्यक्रम में जाने से पहले भी प्रणव मुखर्जी से भेंट की थी। तब इस कार्यक्रम को लेकर हो रहे विवाद के बारे में उन्हें बताया था। तब उन्होंने कहा था कि वे ऐसा कुछ नहीं कहेंगे जो विवादित हो। किसी के कार्यक्रम में जाना गलत नहीं है। उन्होंने अपने भाषण में ऐसा कुछ नहीं कहा था कि जिससे किसी को उन पर निशाना बनाने का मौका मिले।