धामपुर। नगीना लोकसभा सांसद चंद्रशेखर आजाद ने उत्तर प्रदेश में वृद्धावस्था पेंशन योजना से जुड़े नए नियमों को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में सांसद ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा जारी संशोधित आदेश से गरीब, असहाय बुजुर्गों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना गरीब, जरूरतमंद बुजुर्गों के सहारे के लिए बनाई गई थी, लेकिन नए प्रावधानों ने इसे बुजुर्गों के लिए परेशानी का कारण बना दिया है। उन्होंने दावा किया कि 14 मार्च 2026 को जारी संशोधित शासनादेश के तहत वृद्धावस्था पेंशन के लिए आधार कार्ड को जन्म-आयु प्रमाण के रूप में मान्यता नहीं दी जा रही है, जिसके चलते बुजुर्गों से परिवार रजिस्टर की प्रति या शैक्षिक प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज मांगे जा रहे हैं।
बकौल सांसद, इस प्रक्रिया से लाखों बुजुर्ग समाज कल्याण विभाग, सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। बुजुर्ग चलने-फिरने में असमर्थ हैं। इसके बावजूद उन्हें दस्तावेजों के लिए परेशान किया जा रहा है। सांसद ने इसे बुजुर्गों के सम्मान, अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। प्रदेश सरकार से इस आदेश को वापस लेने, आधार कार्ड को आयु प्रमाण के रूप में मान्यता देने और रुकी हुई वृद्धावस्था पेंशन को बिना देरी जारी करने की मांग की। पेंशन कोई एहसान नहीं, बल्कि बुजुर्गों का अधिकार है।
सांसद के बयान के बाद यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बना है। हालांकि, सरकार या संबंधित विभाग की ओर से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।