फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मनरेगा मजदूरों की 50 करोड़ से अधिक की देनदारी

विज्ञापन
विज्ञापन
मनरेगा मजदूरों की 50 करोड़ से अधिक की देनदारी
विज्ञापन

बिजनौर। मनरेगा मजदूरों को काम करने के बाद भी लंबे समय तक मजदूरी नहीं मिलती है। जिले के मनरेगा मजदूरों की विभाग पर 50 करोड़ से अधिक की देनदारी है। मजदूर अपनी मजदूरी के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। आरोप है कि मजदूरी भुगतान में भी दोहरा रवैया अपनाया जा रहा हैं। विभाग मामला शासन स्तर का होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेता है।
जिले में 1123 पंचायत हैं। शासन की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत पंचायतों में चकरोड, रास्ता निर्माण, तालाब खुदाई आदि के काम होते हैं। इस काम में मनरेगा मजदूरों को लगाया जाता है। मनरेगा में केवल विभाग में पंजीकृत मजदूरों को ही काम दिया जाता है। पंचायत मजदूरों को काम का आवंटन करती है। मनरेगा कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में मनरेगा में करीब ढाई लाख मजदूर पंजीकृत हैं। इनमें दो लाख 17851 मजदूर एक्टिव हैं। बताया कि मजदूर के काम मांगने पर ही काम दिया जाता है। योजना में अनेक ऐसे मजदूर पंजीकृत हैं जिन्होंने मजदूरी करने से इंकार कर दिया है। कोरोना काल में गैर राज्यों से आए अनेक लोग इसी श्रेणी के हैं।
विज्ञापन

बताया कि पंजीकृत मजदूर को कम से कम 100 दिन का काम दिया जाता है। मजदूर के काम करने का विवरण शासन को भेजा जाता है। पंचायत शासन को मस्ट रोल भेजती है। रोल के अनुसार ही हर मजदूर को मजदूरी का पैसा मजदूर के खाते में भेजा जाता है। शासन पूरे प्रदेश के मनरेगा मजदूरों के लिए बजट आवंटित करता है। मनरेगा का कामकाज देख रहे भूपेंद्र सिंह बताते हैं कि शासन से तीन दिन पहले सूबे के मनरेगा मजदूरों की मजदूरी के भुगतान के लिए 585 करोड़ आवंटित किया गया है। मजदूरी सीधे मजदूर के बैंक खाते में जाती है। भुगतान का विवरण आनलाइन फीड होता है। विभाग के पास बकाया मजदूरी का कोई डिटेल नहीं होता है। एक अनुमान के अनुसार जिले के मनरेगा मजदूरों को 50 करोड़ से अधिक मजदूरी दी जानी बाकी है।
पंचायत मस्टरोल भेजने में करती है देरी
मनरेगा मजदूरों कलवा, खलील, जमील , कुडवा आदि का कहना है कि उनकी रोज कमाना तथा रोज खाने वाली स्थिति है। मजदूरी देरी से मिलने से उन्हें परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। मजदूर अपनी खून पसीने की कमाई के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने के लिए मजबूर हैं । आरोप है कि दफ्तरों से उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है। पंचायतों द्वारा मस्टरोल भेजने में देरी का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ता है।
विज्ञापन

मजदूरी भुगतान में दोहरा रवैया
कोमल सिंह, भूपेश कुमार, जयप्रकाश, कन्हैया, देवेंद्र आदि मनरेगा मजदूरों का आरोप है कि शासन मजदूरी भुगतान में भी दोहरा रवैया अपना रहा है । कहा कि मनरेगा में सभी वर्ग व बिरादरी के मजदूर काम करते हैं। पंचायतों से सभी मजदूरों का एक ही मस्ट रोल भेजा जाता है। आरोप है कि शासन ने एक जाति के मजदूरों का भुगतान तुरंत भेज दिया जबकि अन्य जातियों के मजदूरों का पेमेंट करीब एक माह भेजा गया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें