बिजनौर। मनरेगा संविदा कर्मचारियों का आठ साल की ईपीएफ कटौती का करोड़ों रुपये यूएएन खातों में जमा नहीं हुआ है। कर्मचारी पैसे को लेकर दुविधा में हैं। साथ ही कर्मचारियों को कई माह के मानदेय का अवशेष नहीं मिलने से आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। मामले में डीएम को ज्ञापन दिया गया है।
मनरेगा तकनीकी सहायक/ अवर अभियंता वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह के मुताबिक मनरेगा योजना में जिला मुख्यालय एवं विकास खंड कार्यालयों में करीब 850 रोजगार सेवक,करीब 100 तकनीकी सहायक आदि सैकड़ों कर्मचारी संविदा पर कार्यरत हैं। आरोप है कि कार्यरत कर्मचारियों की वर्ष 2015-16 से लेकर अब तक ईपीएफ में की जा रही कटौती का पैसा यूएएन खातों में जमा नहीं किया गया है।
भूपेंद्र सिंह के अनुसार करीब आठ वर्ष की ईपीएफ कटौती की धनराशि करोड़ों में है। पैसा जमा नहीं होने से कर्मचारी परेशान हैं। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन द्वारा प्रदान किए जा रहे लाभ से वंचित हैं। मामले को कई बार प्रशासन के समक्ष उठाया गया है। डीएम से ईपीएफ का पैसा यूएएन खातों में जमा करने तथा अवशेष मानदेय का भुगतान करने की मांग की गई है।
बिरूआबाड़ी मंदिर में ठाकुर जी का दुग्ध अभिषेक करते ट्रस्ट के सदस्य। संवाद
बिरूआबाड़ी मंदिर में ठाकुर जी का दुग्ध अभिषेक करते ट्रस्ट के सदस्य। संवाद
बिरूआबाड़ी मंदिर में ठाकुर जी का दुग्ध अभिषेक करते ट्रस्ट के सदस्य। संवाद
बिरूआबाड़ी मंदिर में ठाकुर जी का दुग्ध अभिषेक करते ट्रस्ट के सदस्य। संवाद