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लॉक डाउन के बाद भी दूध के बाजार में नहीं हुआ सुधार

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अनलॉक में भी दूध के बाजार में नहीं हुआ सुधार
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बिजनौर। लॉकडाउन में मार्च में गिरे दूध के दाम अब तक नहीं सुधरे हैं। दूध के दाम अब भी सर्दियों के मुकाबले नौ रुपये प्रति लीटर तक कम चल रहे हैं। हालांकि शहरों में दूध के दामों में कोई गिरावट नहीं आई है। दूध के दाम न उबरने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। माना जा रहा है कि दिल्ली में दूध की मांग कम होने से जिले का दूध का बाजार बैठ गया है।
शहरों के आसपास के गांवों का दूध शहरवासी ही खरीद लेते हैं। गांवों के किसान पराग डेरी व अन्य प्राइवेट डेरियों को दूध बेचते हैं। यह दूध डेरियों द्वारा मुख्य रूप से दिल्ली में बेचा जाता है। दिल्ली में ही दूध की खपत है। लॉकडाउन से पहले दूध के दाम पराग डेरी पर 44 रुपये प्रति लीटर तक चल रहे थे। किसानों से इस रेट पर दूध खरीदा जा रहा था। दूध के दाम गिरने का नुकसान जिले के किसानों को उठाना पड़ रहा है। लॉकडाउन लगते ही दिल्ली में रह रहे दूसरे राज्यों के लोगों ने वापस लौटना शुरू कर दिया। इससे दूध का दाम गिरकर 31 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया था। दिल्ली में दूध की मांग एकदम से इतनी कम हो गई कि पराग डेरी ने तो कई दिन तक किसानों के यहां से दूध भी नहीं उठाया था। लॉकडाउन खुला तो लगा कि दूध के दाम सुधरेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दूध के दामों में केवल तीन रुपये लीटर का ही इजाफा हुआ है। दूध के दाम अब भी 34 रुपये प्रति लीटर ही चल रहे हैं।
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पराग डेरी के कर्मचारी बताते हैं दिल्ली में रहने वाले दूसरे राज्यों के जो परिवार अपने घरों को लौटे हैं उनमें से ज्यादातर की वापसी अब तक नहीं हुई है। इससे वहां का होटल का कारोबार भी बुरी तरह प्रभावित है। वहां दूध की डिमांड ही बहुत कम रह गई तो जिले के किसानों के दूध की वहां पर कदर नहीं हो रही है।
शहर के पास के गांवों में दूध के बंपर रेट
गांवों में दूध का कारोबार भले ही कम हो गया है लेकिन शहर में कोई फर्क नहीं पड़ा है। शहर के आसपास के गांवों में दूध के दाम 55 रुपये प्रति लीटर तक चल रहे हैं।
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दूध बेचने पर मिले सब्सिडी
गांव बसेड़ी निवासी किसान राजवीर सिंह का कहना है कि लॉकडाउन से गांवों में दूध का कारोबार एकदम खत्म सा हो गया है। किसानों के लिए सालों से सरकार दूध पर सब्सिडी देने की बात कह रही है लेकिन कुछ नहीं मिलता है। सरकार को अब किसानों को दूध पर सब्सिडी देनी चाहिए।
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