बिजनौर। किन्ही कारण स्कूल की पढ़ाई छोड़ने वाले छात्र-छात्राओं को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने में मीना मंच मदद करती है। स्कूल चलो अभियान में भी छात्रों को वापस लाने के लिए मीना की कहानी सुनाई जाती है। मीना की कहानी से अन्य अधिकारों के प्रति भी छात्राओं को जागरूक किया जाता है।
मीना यूनिसेफ की एक काल्पनिक कहानी है। यह कहानी छात्राओं को उनके अधिकार व शिक्षा, सजग बनने के लिए प्रेरित करती है। जिले के हर स्कूल में मीना पावर एंजिल बनाया गया है, जो बच्चों को शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक करने और उन्हें स्कूल में बनाए रखने में मदद करता है। इस साल जनपद में ड्राप आउट 800 छात्र-छात्राएं थे। इसके अलावा 350 दिव्यांग छात्र शामिल रहे। बेसिक शिक्षा विभाग ने अभियान चलाकर उन्हें स्पेशल प्रशिक्षण दिया और सरकारी स्कूलों में दाखिला कराया।
उधर जिला समन्वयक अनुज कुमार शर्मा ने बताया कि मीना पावर एंजिल बच्चों को शिक्षा के महत्व के बारे में बताते हैं और उन्हें स्कूल में बनाएं रखने के लिए प्रेरित करते हैं।