बिजनौर/नजीबाबाद। एक शादी में मुलाकात के बाद बीएसएफ के जवान राहुल और मनीषा के बीच प्रेम पनपा। प्रेम संबंधों को शादी की मंजिल तक पहुंचाने में पांच साल लग गए। मगर एक अनबन ने शादी के ढाई साल बाद ही परिवार को उजाड़ दिया। दरअसल मनीषा ने 19 अगस्त को बिजनौर बैराज के गेट नंबर-17 से गंगा में छलांग लगा दी और ठीक चार दिन बाद 24 अगस्त राहुल भी डेढ़ साल के बेटे प्रणव को लेकर इसी गेट से गंगा में कूद गया। तीनों की तलाश के लिए गोताखोर लगे हैं।
राहुल के बड़े भाई गोपाल ने बताया कि 19 अगस्त की सुबह राहुल और मनीषा ने नाश्ता किया। तभी कुछ मनमुटाव हुआ, फिर मनीषा घर का सामान लेने के बहाने घर से निकली लेकिन लौटकर नहीं आई। मनीषा की मां गंज दारानगर निवासी बीना ने पुलिस को दहेज उत्पीड़न के लिए परेशान करने की तहरीर दी, तब से राहुल तनाव में था। वह अपने डेढ़ वर्षीय पुत्र का इलाज कराने किराए की कार से बिजनौर के लिए निकला और पुत्र सहित बैराज से गंगा में छलांग लगा दी।
एक परिवार से तीन लोगों के गंगा में छलांग लगाने से परिवार में मातम है। राहुल की मां धर्मवती देवी का रो-रो कर बुरा हाल है। उसका कहना है कि पुत्र, पोते और पुत्र-वधू के रूप में उसका सब कुछ लुट चुका है। धर्मावती रो-रो कर कह रही है कि ऐसा तो कुछ भी नहीं हुआ था कि पहले मनीषा बैराज से कूदी और फिर उसका बेटा जो स्वयं बीमार चल रहा था बीमार पोते को लेकर बैराज से कूद गया।
2018 में हुई थी दोनों की मुलाकात
राहुल के भाई बताते हैं कि राहुल की साल 2014 में नौकरी लगी। साल 2018 में राहुल की मुलाकात एक शादी में मनीषा से हुई। साल 2023 में फरवरी माह में दोनों की शादी हुई। शुरुआत में परिजन राजी नहीं थे मगर बाद में मान गए और रजामंदी से शादी हुई थी।
एक दिन पहले ही मनीषा ने मायके के मंदिर में चढ़ाया था प्रसाद
जलालाबाद। मनीषा का मायका दारानगर गंज का है। दारानगर स्थित बरखंडी शिव मंदिर पर कोई मन्नत मांगी थी। उसी मन्नत को लेकर सोमवार को मनीषा, राहुल और बेटे के संग मंदिर गई थी। जहां मनीषा की अपनी मां से भी मुलाकात हुई। मनीषा की मां ने राहुल से घर चलने के लिए कहा था, मगर वह नहीं गया। बताया जा रहा है कि राहुल करीब डेढ़ साल से अपनी ससुराल नहीं गया था। उसके मन में कोई खटास थी। मार्च में राहुल की साली की शादी थी, जिसमें मनीषा को ही भेज दिया था। संवाद
पत्नी के गंगा में कूदने के बाद रोज रोता था राहुल
पत्नी मनीषा के गंगा में कूदने के बाद से ही राहुल आहत था। वह लगातार तीन दिनों तक बैराज गया और तलाशी अभियान के बारे में पता करता रहा। दो तीन दिन तक वह काफी रोया भी। हालांकि ससुराल की ओर से उत्पीड़न की तहरीर देने के बाद वह बैराज नहीं गया। जब गया तो बेटे के साथ खुद भी छलांग लगा दी।