फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कहीं पटाखों की तेज आवाज बन न जाए परेशानी का सबब

विज्ञापन
विज्ञापन
तेज आवाज वाले पटाखे बन सकते हैं परेशानी का सबब
विज्ञापन

बिजनौर। आतिशबाजी से निकलने वाला धुआं ही नहीं बल्कि पटाखों की तेज आवाज भी परेशानी का सबब बन सकती है। तेज आवाज के पटाखों से बच्चों के साथ साथ गर्भवस्थ शिशुओं व दिल के मरीजों के लिए समस्या खड़ा हो जाती है। लोगों को तेज आवाज वाले पटाखों से परहेज करना चाहिए।
दीपावली पर आतिशबाजी से केवल वायु प्रदूषण ही नहीं होता है बल्कि इससे ध्वनि प्रदूषण भी होता है। कुछ पटाखों की आवाज तो बहुत तेज होती है। दीपावली पर 125 डीएसबी/डेसिबल तक की आवाज वाले पटाखे छोड़ने की अनुमति रहती है। 125 डीएसबी वाले पटाखे बहुत तेज आवाज करते हैं लेकिन इनसे तेज आवाज वाले पटाखे भी बाजार में आते हैं। इनका प्रयोग भी धड़ल्ले से किया जाता है। सुतली बम और खास तौर से हथौड़ी बहुत तेज आवाज करती हैं। हथौड़ी को तो किशोर भी हाथों में लेकर सड़क पर आने जाने वालों के वाहनों के आगे पीछे फोड़ते रहते हैं। इनसे बहुत तेज आवाज होती है। इससे वायु प्रदूषण के साथ साथ ध्वनि प्रदूषण भी होता है। इनकी आवाज ध्वनि के मानकों से कहीं ज्यादा होती है। खासतौर से गांव देहात में तेज आवाज वाले पटाखे बहुत छोड़े जाते हैं। गांवों में तो मोटे बम बर्तनों के नीचे भी रखकर फोड़े जाते हैं। इससे कई बार गंभीर हादसे हो चुके हैं।
विज्ञापन

ये है नुकसान
तेज आवाज वाले पटाखों से छोटे बच्चों के अंदर डर बैठ जाता है। गर्भ में पल रहे बच्चों को भी तेज आवाज बहुत परेशान करती है। अगर कोई अचानक से कहीं पर तेज आवाज वाला पटाखा छोड़ दे और वहां कोई दिल का मरीज हो तो उसे हार्टअटैक आने का भी खतरा रहता है।
विज्ञापन

नहीं छोड़ें पटाखे
श्री हॉस्पिटल के मालिक वरिष्ठ चिकित्सक डा. शिरीष कुमार का कहना है कि पटाखे वायु व ध्वनि दोनों तरह का प्रदूषण करते हैं। खासतौर से तेज आवाज और ज्यादा धुआं देने वाले पटाखे नहीं छोड़ने चाहिए। यह पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को सीधे तौर पर प्रदूषित करते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें