साहित्यकार दुष्यंत कुमार बने इंद्रदेव के हिंदी भाषा प्रेरणा स्रोत
नजीबाबाद। महान व्यक्तियों की प्रेरणा इंसान की जिंदगी को नई ऊर्जा प्रदान करती है। साहित्यकार और हिंदी गजल के प्रणेता दुष्यंत कुमार ने सेवानिवृत्त कला शिक्षक के हृदय में हिंदी भाषा के प्रति अभिरुचि जागृत की।
एमडीएस इंटर कॉलेज नजीबाबाद से कला शिक्षक सेवानिवृत्त हुए शिक्षक इंद्र देव भारती की रग-रग में हिंदी भाषा का वास है। हिंदी साहित्य और काव्य सृजन उनके जहन में कला के रंगों की तरह बस चुका है। नजीबाबाद के जीआईसी कॉलेज में वर्ष 1962 में जब इंद्रदेव हाईस्कूल में थे तब शिक्षक मुमताज अहमद ने उन्हें राष्ट्रीय कार्यक्रम के लिए गीत प्रस्तुत करने का आमंत्रण दिया।
इंद्रदेव के पिता पंडित चिरंजी लाल शर्मा महान साहित्यकार दुष्यंत कुमार के गांव राजपुर नवादा में प्राइमरी स्कूल में शिक्षक थे। इंद्रदेव ने अपने शिक्षक की प्रेरणा से सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए गीत लिखा। फिल्मी धुन पर पैरोडी गीत जब दुष्यंत कुमार ने देखा तो उन्होंने इंद्रदेव भारती को पैरोडी के गुण दोष से अवगत कराते हुए सहज भाषा हिंदी में मन के भाव अभिव्यक्त करने की सलाह दी।
इंद्रदेव बताते हैं यहीं से उनके हृदय में हिंदी का वास हुआ। कला के रंगों की तरह हिंदी भाषा के रंग शिक्षक इंद्रदेव भारती की जिंदगी का हिस्सा बनने लगे। साहित्य अनुराग के चलते काव्य सृजन के प्रति अभिरुचि बढ़ी। सामाजिक परिवेश से जुड़ी अनेक कविताओं और मुक्तकों ने इंद्रदेव भारती को लोकप्रियता और मंच दिए। स्कूल के कार्यक्रमों में हिंदी भाषा की मजबूत पकड़ ने उन्हें बतौर संचालक पहचान दिलाई।
शिक्षक दयाचंद शास्त्री, यमुना प्रसाद कात्यायन, गोकुल सिंह यादव के सानिध्य ने इंद्रदेव की हिंदी भाषा को समृद्ध बनाया। असंख्य काव्य रचनाएं मंचों और आकाशवाणी से सुनाईं। राष्ट्रीय, सामाजिक लोकगीत, श्रंगार गीत लिखने के माहिर इंद्रदेव के काव्य संकलन में संबंधों के शिशु गीत, हम धरती के चंदा तारे काव्य संकलन हैं। जिसमें बाल गीत, शिशु गीत, किशोर गीत उनकी मजबूत हिंदी पकड़ के प्रमाण हैं। काव्य सृजन में साहित्यिक रुचि रखने वालीं पत्नी ज्योत्सना भारती सहभागी बनीं।
हिंदी पुरोधा काका हाथरसी, गोपालदास नीरज, सोम ठाकुर के सानिध्य में मंचों से काव्य संकलन प्रस्तुत करने का गौरव प्राप्त इंद्रदेव भारती को वाणी हिंदी संस्थान, आकाशवाणी तथा कई अन्य संस्थाओं ने हिंदी में काम करने के लिए सम्मानित किया। इंद्रदेव भारती कहते हैं कि हिंदी एक ऐसी सरल और सहज भाषा है जिसमें राष्ट्रप्रेम, अपनत्व और आपसी संबंधों को मजबूत बनाने की अद्भुत क्षमता समाहित है।