संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। पोक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ओपी वर्मा ने एक किशोरी के चेहरे पर तेजाब डालने के आरोपी कपिल को आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। जबकि किशोरी से दुष्कर्म का आरोप साबित नहीं हो सका। किशोरी के चेहरे पर तेजाब डालने के मामले में सजा होने का यह जिले का पहला मामला है।
विशेष लोक अभियोजक पोक्सो कोर्ट वीनीश कुमार के अनुसार पीड़िता के पिता ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी नाबालिग बेटी पर उनके पड़ोस में रहने वाला कपिल बुरी नजर रखता था। उसने कपिल को कई बार डांटा लेकिन वह नहीं माना। 11/12 फरवरी 2014 की रात साढ़े 12 बजे वह, उसकी बेटी व बेटा घर के बरामदे में सो रहे थे। कपिल उनके घर की दीवार फांदकर अंदर आ गया और उसकी बेटी की रजाई खींचकर हाथ में ली शीशी का तेजाब उसकी बेटी के चेहरे पर डाल दिया और भाग गया। उसकी बेटी का आधा शरीर बुरी तरह से झुलस गया। तेजाब डलने से पीड़िता की बायीं आंख भी पूूरी तरह से खराब हो गई।
पीड़िता के पिता ने बयान में बताया कि घटना के एक साल पहले कपिल की पत्नी बाला पीड़िता को अपने घर बुलाकर ले गई थी। बाला ने पीड़िता को एक कमरे में धक्का देकर बंद कर दिया और कपिल ने पीड़िता से दुष्कर्म किया। कपिल ने पीड़िता के मोबाइल से फोटो खींचे व फिल्म भी बनाई। दोनों ने पीड़िता को धमकी दी कि किसी को बताने पर उसके परिवार को जान से मार देंगे और उसकी वीडियो इंटरनेट पर डाल देंगे। तेजाब डालने से एक सप्ताह पूर्व भी कपिल ने पीड़िता से छेड़छाड़ की थी। पुलिस ने कपिल से तेजाब की शीशी बरामद की थी।
आरोपी कपिल की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि वह इससे पहले किसी अपराध में दोष सिद्ध नहीं है। उसे कम से कम सजा दी जाए।
विशेष लोक अभियोजक द्वारा अदालत में कहा गया कि आरोपी ने घर में घुसकर नाबालिग लड़की पर सोते समय तेजाब डालकर घोर अपराध किया है। नाबालिग के चेहरे पर तेजाब डालकर उसका चेहरा खराब कर दिया गया है। इससे कोई भी व्यक्ति सामान्यतऱ् पीड़िता से विवाह नहीं करेगा, जिससे उसका पूरा जीवन कष्टदायक हो गया है। आरोपी के खिलाफ कठोर से कठोर कार्रवाई की मांग की गई। पीड़िता से दुष्कर्म के आरोप सिद्ध नहीं हो पाए।
दुष्कर्म के मामले में अदालत ने आरोपी बाला देवी को बरी कर दिया। अदालत ने कपिल को धारा 452 के अंतर्गत पांच साल के कठोर कारावास व पांच हजार रुपये अर्थदंड, धारा 326ए में आजीवन कारावास व 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड की राशि में से 20 हजार रुपये पीड़िता को देने के आदेश दिए हैं।