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कम बीज, कम लागत में अधिक उत्पादन दें रहे गुर

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बिजनौर। वर्तमान में धान की नर्सरी का समय चल रहा है। किसान धान की रोपाई से पहले उसके लिए नर्सरी तैयार करने में लगे हुए हैं। कृषि विभाग के अधिकारी किसानों को कम बीज और कम लागत में अधिक उत्पादन के गुर सिखा रहे हैं। विभाग की ओर से किसानों को अनुदान पर धान का बीज भी उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके लिए गोष्ठी व संपर्क और सोशल मीडिया का सहारा लिया जा रहा है।
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जनपद में गन्ना, गेहूं के उपरांत तीसरे नंबर पर धान की रोपाई होती है। यहां किसान अपने परिवार के खाने व थोड़ी बहुत ज्यादा ही धान की रोपाई करते है। आमतौर पर किसान जिस विधि से धान की नर्सरी डालते हैं। उसमें रोपाई वाले खेत के क्षेत्र का 15 से 20 वे भाग में धान की नर्सरी डालते हैं। इस पुरानी विधि की नर्सरी में बीज ज्यादा लगता है और अधिक समय में नर्सरी तैयार होती। रोपाई के लिए नर्सरी से पौधे उखाड़ते समय जड़ें टूट जाती हैं, जिसे रोपाई कर उत्पादन पर असर दिखाई देता है।
धान की नर्सरी ऐसे तैयार करें
कृषि विशेषज्ञ योगेंद्र पाल सिंह योगी ने बताया कि खेत की मिट्टी को रेत छानने वाली बड़ी छलनी में छान लें। गोबर खाद अथवा वर्मी कंपोस्ट को भी छलने में अलग छान कर एकत्र कर लेंगे। इन सब को मिलाकर एक-दो इंच वाला चोकोर एक फ्रेम 90-90 सेमी का बना लें या खेत में 05 सेमी ऊंची एवं 120 सेमी चौड़ी आवश्यकता अनुसार क्यारी (बेड) तैयार कर लें। दोनों ओर एक-एक फिट की नाली छोड़ दें। इन्हीं के द्वारा नर्सरी को पानी दिया जाए। बीज को नर्सरी डालने से पहले 12 घंटे तक भिगोकर रखने के बाद फर्श पर बिछाकर किसी बोरी अथवा पत्तों से इस प्रकार ढक दें, जिससे वह 24 घंटे में अंकुरित हो जाए। उसके बाद उस क्यारी में 200- 250 ग्राम बीज डाल दें। नर्सरी 18-20 दिन में आराम से तैयार हो जाती है।
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