बिजनौर। जिले में बढ़ते गुलदारों के आतंक और लगातार हो रहे मानव-वन्यजीव संघर्ष के बीच अब उनकी वास्तविक संख्या का वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा। भारतीय वन्य जीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) की टीम ने शुक्रवार से बिजनौर में गुलदार गणना का काम शुरू कर दिया। सर्वे के पहले चरण में विशेषज्ञ ग्रामीणों से बातचीत कर गुलदारों की मौजूदगी और गतिविधियों की जानकारी जुटाएंगे, जबकि दूसरे चरण में हॉट स्पॉट क्षेत्रों में कैमरा ट्रैप लगाकर उनकी आवाजाही दर्ज की जाएगी।
शुक्रवार को डब्ल्यूआईआई के वैज्ञानिक आफताब उस्मानी और अन्य विशेषज्ञों की टीम बिजनौर पहुंची। क्षेत्र में जाकर सर्वे भी शुरू कर दिया गया है। इस सर्वे के लिए वन विभाग ने ऐसी जगहों का डाटा टीम को उपलब्ध कराया है, जहां पिछले तीन सालों में गुलदार दिखे हैं या फिर गुलदार पकड़े गए। विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार पिछले छह माह में जिले के करीब 300 जगहों पर गुलदार देखे गए हैं। वहीं जनवरी से अब तक 41 गुलदारों को पकड़कर सुरक्षित चिड़ियाघर और घने जंगलों में छोड़ा जा चुका है। इसके बावजूद आबादी वाले क्षेत्रों में उनकी आवाजाही और हमलों की घटनाएं लगातार बनी हुई हैं।
इस वर्ष गुलदार के हमलों में दो लोगों की मौत हो चुकी है। वन विभाग ने जिले के 190 गांवाें को संवेदनशील श्रेणी में रखा है, जहां सबसे पहले सर्वे किया जाएगा। इनमें गुलदारों की गतिविधियां अधिक होने के कारण स्थानीय लोगों से विस्तृत जानकारी जुटाई जाएगी और उनके आधार पर कैमरा ट्रैप लगाए जाएंगे।
वर्जन
गणना के बाद बनेगी योजना: डीएफओ
डीएफओ जय सिंह कुशवाह ने कहा कि पहली बार जिले में इस तरह का विस्तृत वैज्ञानिक सर्वे कराया जा रहा है। इससे गुलदारों की वास्तविक संख्या, उनके मूवमेंट कॉरिडोर और मानव बस्तियों तक पहुंचने के कारणों का सटीक आकलन हो सकेगा। गणना पूरी होने के बाद विशेषज्ञों के साथ मिलकर वन विभाग दोबारा गुलदार नियंत्रण और नसबंदी का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजेगा।
-
अब तक गुलदार के हमलों में इंसानों की मौत
वर्ष मौत घायल
2023 17 14
2024 08 16
2025 06 20
2026 02 02
नोट: तीन इंसानों की मौत कालागढ़ क्षेत्र में हुई, जिन्हें वन विभाग उत्तराखंड में मानता है
-
साढ़े तीन साल में पकड़े गए गुलदार और कितनों की मौत हुई
वर्ष पकड़े गए मारे गए
2022 10 16
2023 25 12
2024 28 28
2025 36 28
2026 26 16
नोट: यह आंकड़े वन विभाग से लिए गए हैं