कार्बेट नेशनल पार्क में लैंटाना बेकाबू
कालागढ़। कार्बेट नेशनल पार्क में लैंटाना का विस्तार बेकाबू होता जा रहा है। जिसकी वजह से वन्यजीवों का चारा कम होता जा रहा है। वन्यजीवों के आबादी में आने से मानव वन्यजीव संघर्ष की आशंका बढ़ रही है।
कार्बेट नेशनल पार्क में 1990 के दशक से लगातार लैंटाना का विस्तार बढ़ता ही जा रहा है। जिसकी वजह से वनों में हरा चारा कम होना स्वाभाविक है। जंगल में हिरन, बारहसिंगा, नीलगाय, हाथी आदि जीव हरे चारे पर ही निर्भर करते हैं। सांभर व चीतल वनों से बाहर आकर सीमावर्ती ग्रामों के खेतों में चारा खोजते रहते हैं। सांझ ढलते ही शाकाहारी जीव सूखास्रोत के रास्ते सीमावर्ती क्षेत्रों में अपने चारे की खोज में आ जाते हैं। भोर होते ही ये जीव जंगल में चले जाते हैं। कई बार तो हनुमान मंदिर व इंटर कॉलेज के सामने जीवों का सामना राहगीरों से हो जाता है।
खेतों में फसलों को बचाने के लिए रात भर किसान खेतों में रखवाली करते हैं। पोटास गंधक आदि की हथौड़ी की आवाजें निस्तब्धता को भंग करती रहती है। ऐसे में मानव वन्यजीव संघर्ष की नौबत आ जाती है। भिक्कावाला, मीरापुर, कल्लूवाला, मालोनी, शेरगढ़ खदरी आदि गांवों में वन्यजीव अक्सर खेतों में गन्ने आदि की फसलों को निशाना बनाते रहते हैं।
लैंटाना नियंत्रण का काम जारी
कालागढ़ के उप प्रभागीय वनाधिकारी कुंदन सिंह खाती का कहना है कि वनों में लैंटाना उन्मूलन का काम लंबे समय से चल रहा है। काफी क्षेत्र साफ भी कराया जा चुका है। वन्यजीवों को हरा चारा जंगल में ही मिले उसका पूरा प्रयास है। गश्ती दलों को सतर्क किया हुआ है। नागरिकों को भी विभाग को सहयोग करना चाहिए।